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Guava

अमरूद(Guava)

Guava

                                           
अमरूद(Guava)

आज इस आर्टिकल में आपको अमरूद गुण, उपयोग,भाषा,परिचय, फायदे के बारे में जानकारी देंगे मैं आशा करती हूं ये आर्टिकल आपके लिए मददगार रहेगा।

हर मौसम में प्रकृति अलग-अलग फल उत्पन्न करती है जिन्हें सेवन करना उस मौसम के अनुकूल और लाभप्रद होता है।शीतकाल में होने वाले मौसमी फलों में अमरूद एक गुणकारी फल है इसका परिचय और विविध प्रयोगों का विवरण प्रस्तुत है । 

अमरूदअमरूद मध्य अमेरिका में उत्पन्न होने वाले उष्णकटिबंधीय पेड़ हैं।इनके फल अंडाकार आकार में हल्के हरे या पीले रंग के छिलके वाले होते हैं और इनमें खाने योग्य बीज होते हैं। इसके अलावा,अमरूद के पत्तों का उपयोग हर्बल चाय के रूप में और पत्तियों के अर्क को पूरक के रूप में किया जाता है।अमरूद के फल आश्चर्यजनक रूप से एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन सी, पोटेशियम और फाइबर से भरपूर होते हैं। यह उल्लेखनीय पोषक तत्व सामग्री उन्हें कई स्वास्थ्य लाभ देती है।

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अमरूदअमरूद शीतकाल में पैदा होने वाला सस्ता और गुणकारी फल है जो पूरे भारत में उपलब्ध रहता है । इसके पेड़ बाग बगीचों में ही नहीं बल्कि घर के अहाते या बगिया में भी पाये जाते है लिहाजा इसका विशेष परिचय देना आवश्यक नहीं।

 आजकल यह फल सर्वविदित और सर्वत्र उपलब्ध अवश्य है पर इसका मूल उत्पत्ति स्थान पेरू ( अमेरिका ) है । इसका प्रवेश आधुनिक काल में यूरोप वासियों द्वारा हुआ था।शालिग्राम निघण्टु में पेस्कम ' नाम और निघण्टु रत्नाकर में अमृतफल नाम इसका उल्लेख मिलता है ।अमरूद वस्तुतः नासपाती का फारसी नाम है और नासपाती को मदनपाल व भाव प्रकाश निघण्टु ' अमृतफल ' कहा है , परक व सुश्रुत ने नारा-पाती को 'टंक' कहा है । अमरूद का स्पष्ट उल्लेख प्राचीन ग्रन्थों में पढ़ने को नहीं मिला।

अमरूद कई तरह की स्वास्थ्य स्थितियों के लिए एक पारंपरिक उपाय है। शोध बताते हैं कि अमरूद के फल और पत्तियों के कई फायदे हो सकते हैं।

अमरूद पीले-हरे रंग की त्वचा वाले उष्णकटिबंधीय फल हैं, और वे मध्य अमेरिका में पेड़ों पर उगते हैं। आम अमरूद के पेड़ का लैटिन नाम Psidium guajava है ।

भारत और चीन समेत कई देशों में लोग दस्त के इलाज के लिए अमरूद के पत्ते की चाय का इस्तेमाल करते हैं। अन्य देशों में, जैसे कि मेक्सिको,लोगों ने पारंपरिक रूप से घावों को ठीक करने के लिए फल  का उपयोग किया है।

अमरूद हिंदी में(Guava Hindi)

भाषा भेव से नाम भेद(Name Difference by Language)

सं.पेस्कम हवोज, अमृतफल। हि.-जाम ,अमरूद म ,-पेरू।गु- जाम फड़े।वं.पियारा कन्न,-ता गोइया। ता.-कोइया।ये.- शिवे फा.- अमरूद।लं.- ..सीडियम गुयायावा।


Guava Fruit

                                                                Guava Fruit

अमरूद फल(Guava Fruit)

गुण-(Property)

यह मधुर,ग्राही,कच्चेपन में कसैला, पकने मीठा व स्वादिष्ट शीतल , तीक्ष्ण भारी , कफ कारक वात वर्धक, त्रिदोष तथा जलन नाशक और क्षुधावर्धक है ।विविध तरीकों से इसके बीज,पत्ते, जड़ और फल का उपयोग कर विभिन्न रोगों की चिकित्सा की जा सकती है।

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परिचय(Introduction)

अमरूद पांच प्रकार का होता है- 

(1) इलाहाबादी सफेदा

(2) सेब अमरुद 

(3) बेदाना

(4) करेला और

(5)चित्ती वाला 

म . प्र . में होशंगाबाद और उप्र में मिर्जापुर के आसपास काफी अच्छा मीठा और स्वादिष्ट अमरूद होता है इलाहाबादी अमरूदअमरूद में बीज कम और गूदा अधिक होता है जबकि बेदाना में नाम मात्र को बीज होता है। कुछ अमरूद अन्दर से गुलाबी रंग के और कुछ सफेद रंग के होते हैं सफेद रंग का बड़ा फल इलाहाबाद का होने से इलाहाबादी सफेदा कहलाता है । इसमें विटामिन सी सर्वाधिक और न्यून मात्रा में विटामिन ' ए ' को छोड़ कर सभी विटामिन फास्फोरस ,कार्बोहाइड्रेट कैल्शियम लोहा खनिज व प्रोटीन आदि तत्व पाये जाते हैंअमरूद में विटामिन ए और पोटैशियम होता है।अमरूद एक पौष्टिक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन है जो कई महत्वपूर्ण पोषक तत्वों से भरपूर होता है।

अमरूद के फल में शामिल हैं(Guava fruits Include)

68 कैलोरी

14.32 ग्राम कार्बोहाइड्रेट

8.92 ग्राम चीनी

0.95 ग्राम वसा

5.4 ग्राम आहार फाइबर

417 मिलीग्राम पोटेशियम

228.3 मिलीग्राम विटामिन सी

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 उपयोग(Use)

 भोजन के बाद इसे खाने से कब्ज़,अफारा मन्दाग्नि आदि की शिकायत नहीं होती । इसे सामान्यतः सुबह निराहार नाश्ते में खाना अधिक गुणकारी होता है बच्चों के लिए यह बहुत उपयोगी और पौष्टिक होता है अतः बच्चों को अमरूद अवश्य खिलाना चाहिए । यह हृदय, मस्तिष्क स्नायु मण्डल और पाचन संस्थान को बल देता है ।  

 अमरूद के फायदे(Guava benefits)

अमरूद से घरेलू उपचार(Guava home remedies)
 (1).सर्दी-जुकाम(Cold and Cough)

 जुकाम होने पर 1अमरूद का गूदा बिना बीज के खाकर एक गिलास पानी पी लें। ऐसा दिन में २-३ बार करें।पानी पीते समय नाक से सांस न लें और न छोड़े नाक बन्द करके 

 पानी पिएं और मुह से ही सांस बाहर फेंके । इससे जुकाम बहने लगेगा।जुकाम बहना शुरू होते ही अमरूदअमरूद खाना बंद कर दें । १०२ दिन में खूब झड़ जाए तब रात को सोते समय ५० ग्राम  गुड खाकर बिना पानी पिए सो जाएं ।जुकाम ठीक हो जाएगा।

Guava benefits

                                                               Guava benefits

(2).खांसी(Cough)

एक पूरा साबुत अमरूद आग की गरम राख में दबा कर सेक लें । इसे २-३ दिन (प्रतिदिन 1अमरुद )खाने से कफ ढीला हो जाता है निकल जाता हैऔर खांसी में आराम हो जाता है। चाय की पत्ती की जगह अमरूद के पत्ते धो साफ कर पानी में उबालकर दूध शक्कर डालकर चाय की तरह बनाकर छानकर पीने से भी खांसीखांसी में आराम होता है। इसके बीजों को बिही दाना कहते हैं।इन बीजों को सुखाकर पीस लें और थोड़ी मात्रा में शहद के साथ सुबह-शाम खा लें खांसी ठीक हो जाएगी।तेल खटाई का सेवन न करें।

(3).कब्ज(Constipation)

पर्याप्त मात्रा में अमरूद खाने से मल सूखा और कठोर नहीं हो पाता और सफलतापूर्वक शौच हो जाने से कब्जकब्ज नहीं रहता । अमरुद काट कर सोंठ, काली मिर्च और सैन्धा नमक बुरबुरा कर खाने से स्वाद बढ़ता है और पेट का अफारा, गैस और अपच दूर होते हैं। इसे सुबह निराहार खाना चाहिए या भोजन के साथ।

(4).मुख रोग(Oral Disease)

इसके कोमल हरे ताज पत्ते चबाने से मुंह के छाले नरम पड़ते हैं , मसूड़े व दांत मजबूत होते हैं , मुंह की दुर्गंध का नाश होता है । पत्ते चबा कर इसका रस थोड़ी देर मुंह में रख कर इधर उधर घुमाते रहें फिर थूक दें । पत्तों को उबाल कर इस पानी से कुल्ले व गरारे करने से दांत दर्द दूर होता है व मसूड़ों की सूजन व पीड़ा नष्ट होती है । 

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(5).रक्त शर्करा के स्तर को कम करने में मदद कर सकता है-(May Help Reduce Blood Sugar Levels)

कुछ सबूत बताते हैं कि अमरूद रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार कर सकता है।कई टेस्ट-ट्यूब और जानवरों के अध्ययन में पाया गया कि अमरूद की पत्ती का अर्क रक्त शर्करा के स्तर में सुधार करता है,दीर्घकालिक रक्त शर्करा नियंत्रण और इंसुलिन प्रतिरोध मधुमेह या जोखिम वाले लोगों के लिए यह अच्छी खबर है।मनुष्यों से जुड़े कुछ अध्ययनों ने भी प्रभावशाली परिणाम दिखाए हैं।

19 लोगों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि अमरूद के पत्ते की चाय पीने से भोजन के बाद रक्त शर्करा का स्तर कम हो जाता है। टाइप 2 मधुमेह वाले 20 लोगों पर किए गए एक अन्य अध्ययन में पाया गया कि अमरूद के पत्तों की चाय पीने से भोजन के बाद रक्त शर्करा का स्तर 10% से अधिक कम हो जाता है 

-सारांश

अमरूद का अर्क मधुमेह या जोखिम वाले लोगों में रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार करने में मदद कर सकता है।

(6).हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा दे सकता है(May Promote Heart Health)

अमरूद कई तरह से हृदय स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में मदद कर सकता है।कई वैज्ञानिकों का मानना ​​है कि अमरूद के पत्तों में उच्च स्तर के एंटीऑक्सिडेंट और विटामिन आपके दिल को मुक्त कणों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं।अमरूद में पोटेशियम और घुलनशील फाइबर का उच्च स्तर भी हृदय स्वास्थ्य में सुधार के लिए योगदान करने के लिए माना जाता है।इसके अतिरिक्त, अमरूद के पत्तों के अर्क को निम्न रक्तचाप, "खराब" एलडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी और "अच्छे" एचडीएल कोलेस्ट्रॉल में वृद्धि से जोड़ा गया है।चूंकि उच्च रक्तचाप और एलडीएल कोलेस्ट्रॉल के उच्च स्तर को हृदय रोग और स्ट्रोक के उच्च जोखिम से जोड़ा जाता है, अमरूद के पत्ते का अर्क लेने से मूल्यवान लाभ हो सकते हैं।

-सारांश

अमरूद के फल या पत्ती का अर्क रक्तचाप को कम करके, खराब कोलेस्ट्रॉल को कम करके और अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाकर हृदय स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

(7).मासिक धर्म के दर्दनाक लक्षणों से राहत दिलाने में मदद कर सकता है(May Help Relieve Painful Symptoms Of Menstruation)

 कई महिलाओं को कष्टार्तव का अनुभव होता है - मासिक धर्म के दर्दनाक लक्षण, जैसे पेट में ऐंठन।

हालांकि, कुछ प्रमाण हैं कि अमरूद के पत्तों का अर्क मासिक धर्म में ऐंठन के दर्द की तीव्रता को कम कर सकता है।दर्दनाक लक्षणों का अनुभव करने वाली 197 महिलाओं में एक अध्ययन में पाया गया कि रोजाना 6 मिलीग्राम अमरूद के पत्ते का अर्क लेने से दर्द की तीव्रता कम हो गई। यह कुछ दर्द निवारक दवाओं से भी अधिक शक्तिशाली प्रतीत होता है अमरूद की पत्ती का अर्क भी गर्भाशय की ऐंठन को दूर करने में मदद करने के लिए माना जाता है।

-सारांश

अमरूद के पत्तों का अर्क रोजाना लेने से ऐंठन सहित दर्दनाक माहवारी के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

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विविध उपयोग(Miscellaneous Uses)

1.अमरूद खाने या इसके पत्तों का रस पीने से भांग का नशा उत्तर जाता है 

2.बवासीर में आराम होता है ।

3. इसके पत्तों को पीसकर लुगदी बना कर बच्चों की गुदा के मुख पर रख कर बांधने से उनका गुदभ्रंश याने कांच निकलने का रोग भी ठीक होता है  

4.बच्चों को  पतले दस्त बार बार लगते हो तो इसके कोमल व ताजे पत्तों व जड़ की छाल को उबालकर काढ़ा बना कर 2-2 चम्मच सुबह शाम पिलाने से पुराना अतिसार ठीक हो जाएगा ।इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर पिलाने से उल्टी व दस्त होना बंद होता है

5.अमरूद खाते समय इस बात का पूरा ध्यान रखना चाहिए कि इसके बीज ठीक से चबाये बिना पेट में न जाएं।या तो इन्हें खूब अच्छी तरह चबा कर ही निगले या इन्हें अलग करके सिर्फ गूदा ही खाएं। इसका साबूत बीज आंत्र- पुच्छ (अपेंडिक्स) में यदि चला जाए तो अपेन्डिसाइटिस होने की सम्भावना बन जाती है इसलिए अमरूद नींबू टमाटर आदि के बीज चबाये बिना नहीं निगलना चाहिए।

अमरूद का पेड़(Guava tree)

Guava tree

                                                                          Guava Tree

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