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How to Treat Migraine

माइग्रेन का इलाज कैसे करें(How to Treat Migraine)

माइग्रेन को हमेशा के लिए कैसे ठीक करें(How to Cure Migraine Permanently)

आज के जीवन में वैसे ही कई समस्या आदमी का सिरदर्द बनी हुई है ऐसे में यदि व्यक्ति आधासीसी नामक रोग से ग्रसित हो जाए तो करेला नीम चढ़ने वाली बात हो जाती है। सिरदर्द अपने आप में सिर दर्द तो होता ही है इसका इलाज करना भी अच्छा खासा सिर दर्द है।

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इसलिए बेहतर यही है उन कारणों को जाना समझा जाए जो कि सिर दर्द पैदा कर रहे हैं तथा उनसे बचा जाए या उन्हें दूर किया जाए,सिर दर्द के कई कारण होते हैं और कारणों के हिसाब से सिरदर्द कई प्रकार का होता है। उनमें से एक प्रकार है आधासीसी या अर्द्ध कपाली जिसे मेडिकल भाषा में माइग्रेन कहते हैं। माइग्रेन से संबंधित उपयोगी जानकारी और इसकी आयुर्वेदिक चिकित्सा के बारे में जानकारी देंगे।

माइग्रेन एक खराब सिरदर्द से कहीं अधिक है। यह स्नायविक रोग दुर्बल धड़कते हुए दर्द का कारण बन सकता है जो आपको कई दिनों तक बिस्तर पर छोड़ सकता है! आंदोलन, प्रकाश, ध्वनि और अन्य ट्रिगर दर्द, थकान, मतली, दृश्य गड़बड़ी, सुन्नता और झुनझुनी, चिड़चिड़ापन, बोलने में कठिनाई, दृष्टि की अस्थायी हानि और बहुत कुछ जैसे लक्षण पैदा कर सकते हैं

माइग्रेन एक सामान्य स्नायविक रोग है जो कई प्रकार के लक्षणों का कारण बनता है, विशेष रूप से आपके सिर के एक तरफ हुआ सिरदर्द ।लगभग 12% अमेरिकियों में यह अनुवांशिक विकार है। शोध से पता चलता है कि यह दुनिया की छठी सबसे अक्षम करने वाली बीमारी है।

कारण(Reason)

रुखा सुखा आहार,अधिक मात्रा में भोजन,अध्यन करना,पूर्वी हवा का अधिक सेवन करना,ओस में भीगना, मैथुन में अति करना, मल मूत्र के वेगों को रोकना,परिश्रम और व्यायाम के प्रभाव से कुपित हुई वायु का अकेली या कफ के साथ मिलने से बलवान होकर सिर के आधे भाग को जकड़ कर वहां के अंगों में और सिर के आधे भाग में ऐसी तीव्र पीड़ा करना जैसे कोई हथियार से काट रहा हो या मथनी से सिर को मथे डाल रहा हो,इस तरह की असहनीय पीड़ा को आधा सीसी या अर्द्धावभेदक कहते हैं।

अर्द्धावभेदक,आधासीसी,अर्द्धकपाली या माइग्रेन(Migraine)नाम से प्रसिद्ध यह रोग एक वेग में होने वाला घंटों या दिनों तक बने रहने वाला तेज सिर दर्द होता है जिसमें उल्टियां भी हो सकती है।इसका दर्द सिर के एक हिस्से से आरंभ होकर आधे भाग में या कभी-कभी पूरे शरीर में फैल कर तीव्र असहनीय पीड़ा उत्पन्न करता है। यह रोग स्त्रियों में पुरुषों की तुलना में 3 गुना अधिक पाया जाता है तथा मासिक धर्म की तिथि के आसपास के दिनों में इसके होने की संभावना अधिक रहती है। 60% मरीजों में परिवार के अन्य सदस्य भी माइग्रेन से पीड़ित पाये जाते हैं।

आयुर्वेद के अनुसार क्रोध,चिंता,मानसिक तनाव व थकान, अजीर्ण ,नींद का पूरा न होना या अधिक सोने से,रूक्ष आहार, अत्यधिक व अनियमित भोजन करने से,अधिक ठंडे पदार्थों का सेवन,भोजन के दुष्प्रभाव, तीव्र हवा के सेवन, तेज धूप का सेवन,तेज धूप का सेवन, मलमूत्र या अन्य अधारणीय वेगों को रोकने से,अति काम भावना से ग्रस्त होने,अत्यधिक परिश्रम,उत्तेजक पेय पदार्थ जैसे चाय,काफी, शराब आदि का अधिक सेवन, शारीरिक कमजोरी आदि कारणों से वायु कुपित होकर सिर में तनाव व असह्म पीड़ा पैदा कर इस रोग को उत्पन्न करती है।

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 उपरोक्त कारणों या अन्य किसी द्रव्य की एलर्जी से मस्तिष्क के बाहरी आवरण की रक्त वाहानियों के संकुचन से वहां की मांसपेशियों में कम रक्त पहुंचाने या रक्तवाहिनियों के विस्फरण से मस्तिष्क की दीवारों में वेदना होकर तीव्र सिर दर्द की शुरुआत होती है। शिरा नियामक शक्ति(Vasomotor power) की निर्बलता या सरल शब्दों में कहें तो मस्तिष्क की रक्त वाहिनियों में रक्त प्रवाह का परिवर्तन सम्भवतः इस रोग का कारण होता है।

माइग्रेन का दौरा पड़ने पर रोगी को प्रातः सिर घूमता सा लगता है तथा आंखों के सामने अंधेरा सा होने लगता है। इसके बाद में भारीपन,भोजन के प्रति अरुचि उबकाइयां आने लगती है।कई

कई रोगियों को एसिडिटी का अनुभव होता है तथा डकारें आने लगती है।सिर के भी किसी एक भाग में तेज सिर दर्द होता है जो कभी कभी पूरे शरीर में फैल जाता है रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसका सिर में फैल जाता है।रोगी को ऐसा महसूस होता है कि उसका सिर फट जाएगा। रोगी को हिलने-डुलने से परेशानी होती है तथा रोशनी व शोरगुल सहन नहीं होते।रोगी को एकांत अंधेरे स्थान में सुकून मिलता है। सिर पर कसकर कपड़ा बांधने से अच्छा लगता है। उल्टी हो जाने पर दर्द में कमी आ जाती है। यह दर्द 2 दिन 3 दिन तक भी बना रह सकता है।

सिरदर्द के प्रकार(Types Of Headache)

सिरदर्द किस प्रकार का है यह जानने के लिए यह देखना जरूरी होता है कि सिर के किस क्षेत्र या स्थान में दर्द हो रहा है तथा इसकी समयावधि व कोर्स(Course)क्या है?आधासीसी का दर्द ज्यादातर सिर के आधे हिस्से में होता है। इसकी शुरुआत सुबह से या फिर दिन में किसी समय हो सकती है। इसका दर्द आधे घंटे में चरम स्थिति(Peak) पर पहुंच जाता है। और कुछ घंटों से लेकर 1 या 2 दिन तक इसी स्थिति में बना रहता है।तनाव से होने वाला सिरदर्द(Tension Headache) एक बार जब शुरू होता है तो हफ्तों या महीनों तक बना ही रहता है। 

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इस प्रकार के सिर दर्द की शुरुआत धीरे-धीरे होती है यह खोपड़ी के पीछे या माथे के ऊपर वाले हिस्से में होता है और यह दिन रात बना रहता है।मरीज सिर दर्द के साथ सोता है और जब सो कर उठता है तो सिर दर्द को वैसा ही पाता है‌।यह सिरदर्द अवसाद(Depression),भावनात्मक तनाव(Emotional Stress) या चिंता(Anxiety)आदि के कारण होता है।आंखों की कमजोरी या बीमारी के कारण होने वाला सिर दर्द आंखों में,आंखों के पीछे, माथे पर कनपटी पर होता है। यह एक जैसा बना रहता है। नजर कमजोर होने से होने वाला सिरदर्द सुबह सो कर उठने पर नहीं रहता और आंखों का उपयोग करने पर शुरू होता है। एक प्रकार का सिर दर्द,गर्दन की कशेरूकाओं में शोथ(Cervical Spondylitis) होने के कारण होता है जो कि खासतौर पर अधिक समय तक शरीर के निष्क्रिय बने रहने से होता है जैसे रात भर बिस्तर में सोने के बाद सुबह उठने पर सिर दर्द होना। इसके साथ रोगी को चक्कर भी आते हैं तथा गर्दन व कंधों में दर्द हाथों व हाथों में झुनझुनाहट भी आती है। वैसे सुबह उठने पर सिर दर्द होने के पीछे उच्च रक्तचाप(Hypertension) भी होता हैं और इसमें भी रोगी को चक्कर आते हैं।हमारे सिर व चेहरे की हड्डियों में बहुत सी गुहाएं(Cavities) होती हैं जो नाक में खुलती हैं, इन्हें नासाविवर(Paranasal Sinuses) कहते हैं तथा इनके संक्रमण को नासाविवर(Sinuses) शोथ कहते हैं। माथे की हड्डी में पाये जाने वाली गुहाएं(Frontal Sinuses) के संक्रमण या अवरोध होने पर माथे पर व आंखों के आसपास झपकन जैसा दर्द होता है। यह दर्द सुबह शुरू होता है और दिन के साथ बढ़ता जाता है। सिर आगे झुकाने या हिलाने से दर्द बढ़ता है व शाम होने तक यह दर्द दूर हो जाता है।यदि अत्यंत तेज दर्द मरीज को सोने न दे या गहरी नींद से जगा दे तो यह मस्तिष्क में गठान(Tumour) होने का संकेत हो सकता है।

माइग्रेन के प्रकार(Types Of Migraine)

(1).क्लासिक माइग्रेन(Classic Migraine)-

इस प्रकार का माइग्रेन बचपन से लेकर अधेड़ उम्र तक कभी भी हो सकता है।आधी उम्र के बाद और महिलाओं में गर्भावस्था में यह सिर दर्द अक्सर गायब हो जाता है। इसकी तीव्रता(Intensity) और आवर्ती(Frequency) उम्र के साथ कम होती जाती है।यह दिन में होने वाला सिरदर्द है जो कुछ घंटों से लेकर एक-दो दिन तक होता रहता है। अनियमित समयावधि वाला होने से कभी-कभी हफ्तों या महीनों तक नहीं होता तो कभी-कभी एक हफ्ते में चार पांच-बार हो जाता है।यह सिर दर्द माथे पर कनपटी पर,एक तरफ यह दोनों तरफ होता है। इस दर्द के साथ जी मचलाना,मतली होना और उल्टी होना आदि उपद्रव होते हैं। सिर की त्वचा बहुत संवेदनशील हो जाती है और अंत में यह दर्द पूरे सिर में फैल जाता है। क्लासिक माइग्रेन के कुछ खास लक्षण होते हैं जिन्हें प्रारंभिक लक्षण कहते हैं जैसे आंखों के सामने चिंगारियां सी दिखना,आड़ी तिरछी चमकती लकीरें दिखना,आंखों में रोशनी चुभना, आंशिक अंधापन जैसे धब्बों के रूप में शुरू हो कर लगभग आधी दृष्टि खत्म हो जाना। इसके अलावा दौरा पड़ने के दौरान रोगी को समय और स्थान के प्रति भ्रम पैदा हो जाता है,बोलने में लड़खडाहट होती है,चक्कर आते हैं और कानों में आवाजें सुनाई देती हैं। कभी-कभी इसका दौरा पड़ने से पहले चेतावनी देने वाले कुछ लक्षण प्रकट होते हैं जैसे अधिक उल्लास का अहसास करना,अधिक प्यास लगना,मीठा पदार्थ खाने की तीव्र इच्छा होना आदि।

(2)कॉमन माइग्रेन(Common Migraine)-

इसके सारे लक्षण क्लासिक माइग्रेन जैसे होते हैं सिर्फ आंखों के सामने दिखने वाले लक्षण इसमें नहीं पाये जाते।यह सिरदर्द बिना किसी पूर्व लक्षण के सीधे शुरू हो जाता है, सिर्फ मतली और उल्टी होने वाले लक्षण अवश्य पाए जाते हैं।

(3).कॉम्प्लीकेटेड माइग्रेन(Complicated Migraine)-

इसमें सिरदर्द के साथ-साथ,तंत्रिका तंत्र से संबंधित लक्षण(Neurological Symptoms) भी होते हैं जैसे होंठों,चेहरें,हाथ व पैरों में सुइयां चुभने का अहसास होना,कभी-कभी बोलने में तकलीफ होना,शरीर शिथिल हो जाना आदि।

(4).क्लस्टर हेडेक (Cluster Headache)-

इसे पेरोक्सीस्मल नाॅक्टरनल सिफेलज्जिया भी कहते हैं क्योंकि प्रायः इसका दर्द तेज होता है जो एक जैसा आंखों के पीछे और कनपटी पर होता है पहले नाक बंद होती है फिर बहती है,आंसू भी निकलते हैं,चेहरे व गर्दन लाल हो जाते हैं।यह महिलाओं की अपेक्षा पुरूषों में 4 गुना अधिक पाया जाता है। इसकी विशेषता यह होती है कि रात में सोने के दो-तीन घंटे बाद यह से शुरू होता है और 1घंटे बाद ठीक हो जाता है। यह लगातार कई हफ्तों या महीनों तक होता रहता है और फिर महीनों तक नहीं होता इसलिए इसे क्लस्टर हेडेक (समुह में होने वाला) कहा जाता है।

माइग्रेन के लक्षण क्या हैं?(What are the symptoms of migraine)

माइग्रेन का प्राथमिक लक्षण सिरदर्द है। दर्द को कभी-कभी तेज़ या धड़कते हुए वर्णित किया जाता है। यह एक सुस्त दर्द के रूप में शुरू हो सकता है जो स्पंदन दर्द में विकसित होता है जो हल्का, मध्यम या गंभीर होता है। यदि अनुपचारित छोड़ दिया जाता है, तो आपके सिरदर्द का दर्द मध्यम से गंभीर हो जाएगा। दर्द आपके सिर के एक तरफ से दूसरी तरफ शिफ्ट हो सकता है, या यह आपके सिर के सामने, आपके सिर के पिछले हिस्से को प्रभावित कर सकता है या ऐसा महसूस कर सकता है कि यह आपके पूरे सिर को प्रभावित कर रहा है। कुछ लोगों को अपनी आंख या मंदिर के आसपास दर्द महसूस होता है, और कभी-कभी उनके चेहरे, साइनस, जबड़े या गर्दन में दर्द होता है।

माइग्रेन के सिरदर्द के अन्य लक्षणों में शामिल हैं:(Others symptoms of migraine headaches include)

प्रकाश, शोर और गंध के प्रति संवेदनशीलता।


मतली और उल्टी, पेट खराब और पेट दर्द।


भूख में कमी।


बहुत गर्म (पसीना) या ठंड लगना (ठंड लगना)।


पीला त्वचा का रंग (पीला)।


थकान महसूस कर रहा हूँ।


चक्कर आना और धुंधली दृष्टि।


कोमल खोपड़ी।


दस्त (दुर्लभ)।


बुखार (दुर्लभ)।

अधिकांश माइग्रेन लगभग चार घंटे तक चलते हैं, हालांकि गंभीर माइग्रेन अधिक समय तक चल सकते हैं।

माइग्रेन के सिरदर्द का इलाज कैसे करें(How to Treat Migraine Headache)

उपचार(The Treatment)

माइग्रेन के लक्षणों को कम करने के प्राकृतिक तरीके

माइग्रेन सामान्य सिरदर्द नहीं हैं। यदि आप उनका अनुभव करते हैं, तो आप जानते हैं कि आपको तेज़ दर्द, मतली और प्रकाश और ध्वनि के प्रति संवेदनशीलता का अनुभव हो सकता है। जब एक माइग्रेन हमला करता है, तो आप इसे दूर करने के लिए लगभग कुछ भी करेंगे।

(1).आधासीसी के पुराने रोगियों को किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक के मार्गदर्शन में स्नेहन,स्वेदन,विरेचन,शिरोधारा, धूप एवं नस्य का प्रयोग करना लाभकारी होता है।

(2).सिर दर्द के लिए बाय बिडंग और काले तिल दोनों 10-10ग्राम मात्रा में लेकर दूध में गलाकर पीस लें और इस लेप को सिर पर लगाएं तथा गाय के घी की 6-6बूंदे दोनों नासा छिद्रों में डालें।

(3).शिरःशूलादिवजरस 5ग्राम, स्वर्ण-माक्षिक भस्म 5ग्राम,प्रवाल पिष्टी 5ग्राम,मोती पिष्टी 2ग्राम, प्रवाल पंचामृत (मुक्तायुक्त)ढाई ग्राम, गोदन्ती भस्म 5ग्राम।इन सबकों अच्छे से मिला कर इसकी 30मात्रा बना लें।1-1मात्रा सुबह-शाम आंवले के मुरब्बे के साथ लें।इसके साथ त्रिफलाघृत या ब्राह्मी घृत की 1-1 चम्मच सुबह शाम लें। भूनिम्बादी क्वाथ 10ml और पथ्यादिक्वाथ10ml मिलाकर 20ml पानी में तथा शिरःशूलहरवटी की 2गोली दोनों वक्त के भोजन के बाद लें‌।

अर्द्धकपाली के रोगी को सुर्योदय से पहले उठकर मीठा जैसे- पेड़ा,रबड़ी,कलाकंद,बादाम, गाजर या मूंग का हलवा जैसा तीव्र कफवर्द्धक आहार लेना चाहिए तथा एक से डेढ़ घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए। इससे वायु दोष का शमन होता है। और माइग्रेन का दौरा नहीं पड़ता है। इसके साथ ही पेट साफ रखना व कब्ज न रहने देना भी आवश्यक है। अधिकांश घरेलू नुस्खों में आधाशीशी के उपचार में इस तरह मिठाई के साथ दवा  देने का प्रचलन पुरानी पीढ़ी के लोगों में आज भी मौजूद है।

-प्राकृतिक उपचार माइग्रेन के लक्षणों को कम करने का एक दवा मुक्त तरीका है। ये घरेलू उपचार माइग्रेन को रोकने में मदद कर सकते हैं, या कम से कम उनकी गंभीरता और अवधि को कम करने में मदद कर सकते हैं।

1.हॉट डॉग से बचें(Avoid hot dogs)

माइग्रेन को रोकने में आहार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कई खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ माइग्रेन ट्रिगर के रूप में जाने जाते हैं, जैसे:

नाइट्रेट युक्त खाद्य पदार्थ जिनमें हॉट

डॉग, डेली मीट, बेकन और सॉसेज शामिल हैं

चॉकलेट

पनीर जिसमें

प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले यौगिक टाइरामाइन होते हैं, जैसे कि नीला, फेटा, चेडर, परमेसन

और स्विस

शराब, विशेष रूप से रेड वाइन

ऐसे खाद्य पदार्थ जिनमें मोनोसोडियम

ग्लूटामेट (MSG), एक स्वाद बढ़ाने वाला होता है

ऐसे खाद्य पदार्थ जो बहुत ठंडे होते हैं जैसे

आइसक्रीम या आइस्ड ड्रिंक्स

प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ

मसालेदार भोजन

फलियां

सूखे मेवे

सुसंस्कृत डेयरी उत्पाद जैसे

छाछ, खट्टा क्रीम और दही

कैफीन की थोड़ी मात्रा कुछ लोगों में माइग्रेन के दर्द को कम कर सकती है। कुछ माइग्रेन की दवाओं में भी कैफीन होता है। लेकिन, बहुत अधिक कैफीन माइग्रेन का कारण बन सकता है। यह एक गंभीर कैफीन निकासी सिरदर्द भी पैदा कर सकता है।

यह पता लगाने के लिए कि कौन से खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ आपके माइग्रेन को ट्रिगर करते हैं, एक दैनिक भोजन डायरी रखें। आप जो कुछ भी खाते हैं उसे रिकॉर्ड करें और नोट करें कि आप बाद में कैसा महसूस करते हैं।

2.लैवेंडर का तेल लगाएं(Apply lavender oil)

लैवेंडर आवश्यक तेल को सांस लेने से माइग्रेन का दर्द कम हो सकता है। 2012 के शोध के अनुसार , जिन लोगों ने माइग्रेन के हमले के दौरान 15 मिनट के लिए लैवेंडर के तेल में सांस ली, उन्हें प्लेसबो लेने वालों की तुलना में तेजी से राहत मिली। लैवेंडर का तेल सीधे अंदर लिया जा सकता है या मंदिरों में पतला लगाया जा सकता है।

3.एक्यूप्रेशर का प्रयास करें(Try Acupressure)

एक्यूप्रेशर दर्द और अन्य लक्षणों को दूर करने के लिए शरीर पर विशिष्ट बिंदुओं पर उंगलियों और हाथों से दबाव डालने का अभ्यास है। एक के अनुसार2014 व्यवस्थित समीक्षाविश्वसनीय स्रोतएक्यूप्रेशर पुराने सिरदर्द और अन्य स्थितियों से पीड़ित लोगों के लिए एक विश्वसनीय वैकल्पिक चिकित्सा है। एक अलग अध्ययन में पाया गया कि एक्यूप्रेशर माइग्रेन से संबंधित मतली को दूर करने में मदद कर सकता है।

4.फीवरफ्यू की तलाश करें(Look for Feverfew)

फीवरफ्यू एक फूल वाली जड़ी बूटी है जो डेज़ी की तरह दिखती है। यह माइग्रेन के लिए एक लोक उपचार है। एक के अनुसार2004 व्यवस्थित समीक्षाविश्वसनीय स्रोतहालांकि, इस बात के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं कि फीवरफ्यू माइग्रेन को रोकता है। फिर भी, बहुत से लोग दावा करते हैं कि यह बिना साइड इफेक्ट के उनके माइग्रेन के लक्षणों में मदद करता है।

5.पुदीने का तेल लगाएं(Apply peppermint oil)

पेपरमिंट ऑयल में मेन्थॉल एक माइग्रेन को आने से रोक सकता है, जैसा कि ए २०१० अध्ययनविश्वसनीय स्रोत. अध्ययन में पाया गया कि माथे और मंदिरों पर मेन्थॉल घोल लगाना माइग्रेन से जुड़े दर्द, मतली और हल्की संवेदनशीलता के लिए प्लेसबो की तुलना में अधिक प्रभावी था।

6.अदरक(Ginger)

अदरक को माइग्रेन सहित कई स्थितियों के कारण होने वाली मतली को कम करने के लिए जाना जाता है। इसके अन्य माइग्रेन लाभ भी हो सकते हैं। के अनुसारअनुसंधानविश्वसनीय स्रोत, अदरक पाउडर ने माइग्रेन की गंभीरता और अवधि के साथ-साथ प्रिस्क्रिप्शन ड्रग सुमाट्रिप्टन को कम किया, और कम साइड इफेक्ट के साथ।

7. योग के लिए साइन अप करें(Sign up for Yoga)

योग स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देने के लिए श्वास, ध्यान और शरीर की मुद्राओं का उपयोग करता है। अनुसंधानविश्वसनीय स्रोतदिखाता है कि योग माइग्रेन की आवृत्ति, अवधि और तीव्रता को कम कर सकता है। यह चिंता में सुधार, माइग्रेन-ट्रिगर क्षेत्रों में तनाव मुक्त करने और संवहनी स्वास्थ्य में सुधार करने के लिए सोचा गया है।

हालांकि शोधकर्ताओं ने निष्कर्ष निकाला है कि माइग्रेन के लिए प्राथमिक उपचार के रूप में योग की सिफारिश करना जल्दबाजी होगी, उनका मानना ​​​​है कि योग समग्र स्वास्थ्य का समर्थन करता है और पूरक चिकित्सा के रूप में फायदेमंद हो सकता है।

8. बायोफीडबैक का प्रयास करें(Try Biofeedback)

बायोफीडबैक एक विश्राम विधि है। यह आपको तनाव के लिए स्वायत्त प्रतिक्रियाओं को नियंत्रित करना सिखाता है। बायोफीडबैक मांसपेशियों में तनाव जैसे तनाव के लिए शारीरिक प्रतिक्रियाओं से उत्पन्न होने वाले माइग्रेन के लिए मददगार हो सकता है

9. मैग्नीशियम को अपने आहार में शामिल करें(Add magnesium to your diet)

मैग्नीशियम की कमी सिरदर्द और माइग्रेन से जुड़ी होती है। अध्ययनों से पता चलता है कि मैग्नीशियम ऑक्साइड पूरकता आभा के साथ माइग्रेन को रोकने में मदद करती है। यह मासिक धर्म से संबंधित माइग्रेन को भी रोक सकता है।

आप उन खाद्य पदार्थों से मैग्नीशियम प्राप्त कर सकते हैं जिनमें शामिल हैं:(You can get magnesium from foods that include)

-बादाम

-तिल के बीज

-सूरजमुखी के बीज

-ब्राजील सुपारी

-काजू

-मूंगफली का मक्खन

-दलिया

-अंडे

-दूध

10.मसाज करें।(massage)

एक साप्ताहिक मालिश से माइग्रेन की आवृत्ति कम हो सकती है और नींद की गुणवत्ता में सुधार हो सकता है २००६ का अध्ययनविश्वसनीय स्रोत. शोध से पता चलता है कि मालिश से कथित तनाव और मुकाबला करने के कौशल में सुधार होता है। यह हृदय गति, चिंता और कोर्टिसोल के स्तर को कम करने में भी मदद करता है।

-माइग्रेन का सिरदर्द कितना आम है?(How common are migraine headaches)

विशेषज्ञों का अनुमान है कि लगभग आधी वयस्क आबादी सिरदर्द का अनुभव करती है और 12% अमेरिकियों को माइग्रेन का सिरदर्द होता है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को माइग्रेन का अनुभव होने की संभावना लगभग तीन गुना अधिक होती है।

-माइग्रेन किसे होता है? जोखिम कारक क्या हैं?(Who gets migraine? What Are the Risk Factors)

यह अनुमान लगाना मुश्किल है कि किसे माइग्रेन हो सकता है और किसे नहीं, लेकिन ऐसे जोखिम कारक हैं जो आपको अधिक संवेदनशील बना सकते हैं। इन जोखिम कारकों में शामिल हैं:

अनुवांशिकी:(Genetics)

माइग्रेन के सिरदर्द से पीड़ित 80% लोगों में इस बीमारी के संबंध में प्रथम श्रेणी का संबंध होता है।

लिंग(gender)

 माइग्रेन का सिरदर्द पुरुषों की तुलना में महिलाओं को अधिक होता है, विशेषकर 15 से 55 वर्ष की आयु की महिलाओं को । हार्मोन के प्रभाव के कारण महिलाओं में यह अधिक आम है ।

तनाव का स्तर(stress level)

 यदि आप उच्च तनाव में हैं तो आपको अधिक बार माइग्रेन हो सकता है। तनाव माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है।

धूम्रपान।

-माइग्रेन कितनी बार होता है?(How often do migraines happen)

माइग्रेन की बारंबारता साल में एक बार, सप्ताह में एक बार या बीच में कितनी भी बार हो सकती है। प्रति माह दो से चार माइग्रेन का सिरदर्द होना सबसे आम है।

-क्या माइग्रेन वंशानुगत हैं?(Are migraines hereditary)

माइग्रेन परिवारों में चलते हैं। माइग्रेन से पीड़ित पांच में से चार लोगों का पारिवारिक इतिहास रहा है। यदि माता-पिता में से किसी एक को माइग्रेन का इतिहास रहा हो, तो उनके बच्चे में माइग्रेन होने की 50% संभावना होती है। यदि माता-पिता दोनों को माइग्रेन का इतिहास रहा है, तो जोखिम 75% तक बढ़ जाता है। फिर से, माइग्रेन से पीड़ित 80% लोगों में इस बीमारी के साथ पहली डिग्री का रिश्तेदार होता है।

-क्या बच्चों को माइग्रेन हो सकता है?(Can children get migraines)

हां, लेकिन बच्चों के माइग्रेन अक्सर कम होते हैं और पेट के लक्षण अधिक होते हैं।

क्या माइग्रेन स्थायी मस्तिष्क क्षति का कारण बनता है? अगर मुझे माइग्रेन है, तो क्या इसका मतलब है कि मुझे दूसरी बीमारी हो जाएगी?

नहीं, माइग्रेन से मस्तिष्क क्षति नहीं होती है।

जिन लोगों को ऑरा के साथ माइग्रेन होता है, उनमें स्ट्रोक का एक छोटा जोखिम होता है - 100,000 में से 1 या 2 लोग।




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