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Exercises For Weight loss

वजन घटाने के लिए व्यायाम(Exercises For Weight loss)

मोटापे के कारण, दुष्प्रभाव, उत्पन्न रोग ,उपचार, सावधानी(Causes Of Obesity, Side Effects, disease Caused, Treatment, Precautions)

Exercises For Weight loss
स्वाभाविक रूप से वजन कैसे कम करें(How to lose Weight Naturally)

इस आर्टिकल में आपको आज वजन घटाने के लिए 5व्यायाम  बतायेंगे स्वास्थ्य और आयु के शत्रु मोटापे से संबंधित,आयुर्वेदिक उपचार के बारे में जानकारी दी जाएगी। मैं आशा करती हूं ये आर्टिकल आपके लिए हेल्पफुल रहेगा।और इस आर्टिकल में आपको मोटापे के कारण इससे बचाव और मोटापा दूर करने वाले उपायों के बारे में भी जानकारी दी जाएगी।

आज की परेशानियों में एक परेशानी है मोटापा, जो खुद तो एक परेशानी है ही, दूसरी कई जानलेवा बीमारी की जड़ भी है।यदि उचित खान-पान और जीवनशैली का अनुशासनबद्ध पालन किया जाए तो मोटापा आ ही नहीं सकता।

 हमारे शारीरिक स्वास्थ्य के बने रहने के लिए आवश्यक पोषक तत्व तथा शारीरिक प्रतिक्रियाओं व शक्ति के लिए आवश्यक ऊर्जा की आपूर्ति अच्छे खाने के द्वारा ही होती है जो हम प्रतिदिन ग्रहण करते हैं।यदि यह आपूर्ति आवश्यकता से अधिक हो जाए यानी आवश्यक मात्रा से अधिक खाना खाया जाए तो अतिरिक्त खाना वसा(चर्बी)में परिवर्तित हो जाता है। जब हम अधिक मात्रा में खाना निरंतर खाते रहते हैं तो वह चर्बी(मेद)संचय से हमारा वजन बढ़ने लगता है। और यदि यह वजन बढ़ना जारी रहता है तो हम मोटापे(obesity) से ग्रस्त हो जाते हैं।तो आपको समझ में आ गया होगा मोटापा कैसे बढ़ता है

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मोटापे का मतलब है शरीर में अत्यधिक चर्बी (Fat)का एकत्र हो जाना।आयुर्वेद में इसे मेदोवृद्धि कहा जाता है। उच्च रक्तचाप या मधुमेह की तरह ही मोटापे को भी एक लम्बी अवधि (जीर्ण)का रोग माना जाता है। इसके कई गम्भीर दुष्परिणाम भी होते हैं।जिन मौतों को टाला जा सकता है उनके कारणों में तंबाकू के बाद दूसरे नंबर पर मोटापा आता है।

आजकल समाचार पत्रों(Newspaper)में 10 दिन या 1 माह में कई किलो वजन कम करने वाले कई विज्ञापनों आते हैं। दिन प्रतिदिन नए शरीर को स्लिम करने के सेंटर खुल रहे हैं।

इन सेंटरों पर इलाज में मोटापे पर लगने वाले खर्च को वहन करना साधारण आय वाले व्यक्ति के बस की बात नहीं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जब वजन धीमी गति से बढ़ता है ,तो उसी गति से कम भी होगा। यदि किसी चमत्कारी दवा या अन्य तरीके से तेज गति से वजन कम किया जाएगा तो वह शरीर के लिए नुकसानदायक ही होता है।

कुछ विशिष्ट कारणों को छोड़ दिया जाए तो अन्य किसी भी कारण से मोटापा इतनी तेज गति से नहीं बढ़ता की एक माह में 10 किलो वजन बढ़ जाए। यदि किसी तरीके से इस गति से वजन कम हो भी जाए तो पुनः बहुत तेजी से बढ़ता है। इसका कारण यह है कि जब शरीर में वसा (चर्बी) बढ़ने से वजन बढ़ता है तो शुरुआत में वसा कोशिकाओं(Fat cells) का आकार बढ़ता है और जब उनका आकार अधिकतम हो जाता है तथा अतिरिक्त आहार का वसा में परिवर्तन जारी रहता है तो इन वसा कोशिकाओं की संख्या बढ़ने लगती है।जब वजन कम होता है तो वसा कोशिकाओं का आकार तो कम हो जाता है परंतु इनकी बढ़ी हुई संख्या कम नहीं होती। यही कारण है कि मोटापा कम हो जाने के बाद जरा सी लापरवाही करने पर वजन तेजी से बढ़ता है।

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इसलिए मोटापे से ग्रस्त व्यक्तियों से यह अनुरोध है कि व्यायाम, प्राणायाम और हानिरहित आयुर्वेदिक औषधियों के सेवन कर मोटापे के कारणों का त्याग करते हुए अच्छा खाना-पानी और दिनचर्या का अच्छे से पालन कर इस समस्या से छुटकारा पा लेना चाहिए। मोटापे से छुटकारा पाने के लिए किसी भी तरह का शार्ट कट अपनाना शरीर के लिए नुकसानदायक हो सकता है।इतनी बातचीत के बाद आइए  मोटापे के विषय की और इस चर्चा को आगे बढ़ाएं।

आयुर्वेद के अनुसार अधिक स्थूल(मोटा)और अधिक कृश(पतला) दोनों ही सदा गर्हित(implied)माने गए हैं।न मोटा न पतला अर्थात मध्य शरीर का मनुष्य ही श्रेष्ठ होता है और मोटे की अपेक्षा पतला मनुष्य फिर अच्छा होता है यथा-

अत्यन्तगर्हिता वे तौ सदा स्थूल कृशौ नरौ। 

श्रेष्ठो मध्य शरीरस्तु कृशःस्थुलात्तु पूजितः।।

अव्यायाम दिवास्वप्न श्लेष्मलाहार सेविनः।

मधुरोऽन्नरसः प्रायः स्नेहान्मेदो विवर्द्धयेत।।

अर्थात व्यायाम (या परिश्रम)न करने, दिन में सोने,कफ बढ़ाने वाला आहार लेने, मधुर रस वाले पदार्थों का सेवन करने,अन्नरस (आम)तथा स्नेह (चिकने) पदार्थों के सेवन से शरीर में मेद(चर्बी)की वृद्धि होती हैं।

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कारण(Reason)

अनुवांशिक प्रभाव(Genetic Effect)

शरीर के मोटे होने के पीछे वंशानुगत तत्व भी महत्वपूर्ण कारण होता हैं।यदि माता-पिता अति स्थूलता(मोटापे)से ग्रस्त हों तो बच्चों में मोटापा आने की संभावना बढ़ जाती है। शरीर के मोटा होने में जींस की भूमिका तो होती है किंतु इस तथ्य को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि एक ही परिवार में खानपान की आदत, आहारीय पदार्थ, जीवनशैली और दिनचर्या (शारीरिक श्रम) लगभग समान ही रहते हैं।

निष्क्रिय जीवनशैली और दिनचर्या(Inactive lifestyle and Routine)

दैनिक जीवन में शारीरिक श्रम(मेहनत)का न होना मोटापे का एक बड़ा कारण होता है। पहाड़ी इलाके में रहने वाले लोगों में मोटापा ढूंढने से नहीं मिलता क्योंकि पहाड़ चढ़ना उतरना उनकी दिनचर्या का हिस्सा होता है जबकि वो दिन में कई बार खाना खाते हैं।इसी तरह गांवों में खेती करने वाले व्यक्ति को रोज मिलों पैदल चलना और धूप में परिश्रम करना पड़ता है इसलिए गांवों में भी मोटे लोग कम मिलते हैं। समस्या तो शहरी और सम्पन्न लोगों के साथ हैं क्योंकि अधिकांश लोगों का व्यवसाय या नौकरी ऐसी होती हैं कि पूरा दिन कुर्सी तोड़ते हुए गुजरता है। फिर बाजार या कहीं भी जाना हो तो वाहन सुविधा उपलब्ध रहती है। इस पर अधिकांशतः लोग व्यायाम के लिए समय नहीं निकाल पाते।

गलत खानपान(Wrong Eating)

आवश्यकता से अधिक और बार-बार खाने की आदत तो मोटापे का एक बड़ा कारण है ही,साथ ही खराब वसा(Trans Fat) और मैदे से बने पदार्थ को खाने का चलन भी इस परेशानी को बढ़ाने में सहयोगी हो रहे हैं।आजकल के खाने में रेशे की मात्रा बहुत कम रह गई है जो शरीर में चयापचय विकृति को उत्पन्न कर मोटापा लाने वाली होती है। बात यह है कि एक बार मोटापा उत्पन्न हो जाए तो व्यक्ति एक दुश्चक्र में फंस जाता है।आयुर्वेद के अनुसार 

'मेदसाऽऽवृत मार्ग त्वाद्वायुःकोष्षे विशेषतः।

 चरन् सन्धुक्षयत्यग्निमाहांर शोषयत्यपि।।

 मेद बढ़ कर जब स्त्रोतों में अवरोध कर देता है तब कोष्ठ में विशेषकर पेट में वायु रूक जाती हैं।और विचरण करती हुई जठराग्नि को अति प्रदीप्त कर देती है तथा आहार को सुखा देती है और 

'तस्मात् से शीघ्रं जर यत्याहारंचाति काःति।

अर्थात प्रदीप्त अग्नि शीघ्र ही आहार को पचा देती है तथा बार-बार समझदार सिगरेट तैयारी करती प्रदीप अग्नि सूर्य हार को पचा देती है तथा बार-बार अधिक मात्रा में आहार की आकांक्षा करती है जिससे मोटा व्यक्ति फिर भूख अनुभव करता है। इस तरह व्यक्ति का मोटापा बढ़ता चला जाता है। आजकल चीज-मक्खन युक्त व्यंजन, मैदे से बने पदार्थ,आइसक्रीम,कोल्ड ड्रिंक्स का शौक बचपन से ही लग जाता है और कम उम्र से ही शरीर मोटापे से ग्रस्त हो जाता है।

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मनोवैज्ञानिक कारण(psychological reasons)

कुछ लोग ऐसी ही भावनात्मक स्थितियों में ज्यादा खाते हैं जिनका भूख से कोई लेना देना नहीं होता जैसे-अवसाद,निराशा,क्रोध,असफलता,बोरियत,आदि।

कहने का तात्पर्य यह है कि भावनाएं हमारे आहार ग्रहण करने की आदत और प्रवृत्ति को प्रभावित करती है।

लिंग प्रभाव(Gender Effect) 

स्त्री शरीर की तुलना में पुरुष शरीर में पेशीयमान(Muscle Mass)अधिक होता है और चूंकि अन्य ऊतकों की तुलना में पेशियां ज्यादा ऊर्जा व्यय करती है इसलिए स्त्रियों में पुरुषों के मुकाबले मोटापा उत्पन्न होने की संभावना अधिक रहती है। स्त्रियों में मोटापे का एक महत्वपूर्ण कारण गर्भावस्था भी है। प्रत्येक गर्भ स्थापना और शिशु जन्म के बाद स्त्री का वजन बढ़ जाता है।

वयोवृद्धि(puberty)

जैसे-जैसे बढ़ती जाती है शरीर में पेशीय मान कम होता जाता है और वसा (चर्बी) का मान बढ़ता जाता है। फिर उम्र के साथ शरीर में चयापचय भी धीमा हो जाता है। कहने का सार है कि बढ़ती उम्र के साथ ऊर्जा की आवश्यकता कम होती जाती है अतः आहार भी कम करते जाना चाहिए।

रोग और दवाओं के दुष्प्रभाव(Diseases and side effects of drugs)

 कुछ और दवाओं के दुष्प्रभाव स्वरूप मोटापा उत्पन्न होता है हालांकि ऐसे मामले कम पाये जाते हैं। थायराॅइड ग्रन्थि,पीयुष ग्रन्थि,एरिनलनग ग्रन्थि के रोग तथा स्टेराॅइड, अवसाद रोधी दवाएं व गर्भनिरोधक गोलीयां आदि से मोटापा आता है।

मोटापे से उत्पन्न दुष्प्रभाव(Side Effects Of Obesity)

अतिस्थूल व्यक्ति में शारीरिक कुरूपता के अतिरिक्त अन्य दूसरे दोष भी होते हैं।कहा गया है-

अतिस्थूलस्य तावदायुषो ह्रासो जीवों परोधःकृच्छ-व्यवायता दौर्बल्यं दौर्गन्ध्यं स्वेता बाधः क्षुदतिमात्रं पिपासाति योगश्चेति भवन्त्यट्षौ दोषाः। अर्थात्

- मोटापा से आयु का ह्रास(कम)हो जाती है।

-शरीर में स्फूर्ति और उत्साह नहीं होता है।

-मैथुन शक्ति की कमी या मैथुन क्रिया में कठिनाई

-दुर्बलता

-शरीर में दुर्गंध का होना

-अत्यधिक पसीना आना

-अत्यधिक भूख लगना और 

-अत्यधिक प्यास लगना

ये आठ दोष अति स्थूल व्यक्ति में होते हैं।

मोटापे से उत्पन्न दोषों के विषय में कहा गया है 

अधिक स्थूल हुए मनुष्य में क्षुद्रश्वास, पिपासा,क्षुधाधिक्य,निद्रा,स्वेद, शरीर में दुर्गंध, सहसा श्वास का रूक जाना, अंगों की पीड़ा या थकान आदि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं।

आयु का ह्रास(कम)Aging (less)

अति मोटापा से ग्रस्त व्यक्ति की आयु कम हो जाती है ।अंग्रेजी में कहावत में एक कहावत है-"The longer the belt,shorter the life" यानी जिसके पेट का घेरा जितना अधिक होगा उसका जीवन काल उतना ही काम होगा। मोटे व्यक्ति में मेद(चर्बी) अधिक बढ़ती है और उसका ही संचय होता है।कफ और फैट (वसा) रसादिवाहक स्रोतसों के मार्ग को अवरूद्ध कर शेष उत्तरोत्तर धातुओं को पुष्ट नहीं होने देते जिससे अन्य धातुओं का ह्रास होने के कारण मोटे व्यक्ति की आयु क्षीण हो जाती है। मोटे व्यक्ति में अग्नि और वायु दोनों बढ़ कर बहुत विकार करते हैं। और मोटे व्यक्ति को इस प्रकार जलाने लगते हैं जैसे जंगल की आग वायु से मिल कर जंगल को जला डालती है।

यौन समस्याएं(Sexual Problems)

मोटापा स्त्रियों के गर्भधारण में तो बाधक होता ही है लेकिन पुरुषों के यौन स्वास्थ्य पर भी दुष्प्रभाव डालता है।मोटापा बढ़ने के साथ शिश्न उत्थान में समस्या(Erectile Dysfunction)भी बढ़ती जाती है। अति मोटापा शुक्राणु निर्माण में कमी लाते हुए पुरुष को पिता नहीं बनने देता। दरअसल यह टेस्टोस्टेरॉन हार्मोन की कमी होने से होता है। कहने का तात्पर्य है कि मोटापा यौनेच्छा में कमी,नपुंसकता,यौन क्रिया में कठिनाई और बन्ध्यता उत्पन्न करता है।कफ और फैट(वसा) से शुक्र वह स्रोतसों के निरुद्ध हो जाने से स्त्री सम्भोग करने में पुरुष अधिक समर्थ नहीं होता। फिर फैट(वसा) की वृद्धि और रसादि अन्य धातुओं के ह्रास क्रम से शुक्र धातु भी कम बनता है इस कारण  यौन समस्याएं भी उत्पन्न हो जाती है।

मोटापे से उत्पन्न रोग(Obesity Related Disease)

मोटापा जहां कई रोगों की जड़ होता है वहीं कई रोगों की तीव्रता में वृद्धि करने वाला भी होता है। 

-हृदय रोग(हृदय शूल, हृदयघात),

-उच्च रक्तचाप,

-मधुमेह,

-अस्थिसन्धिशोथ,

-गाउट,

आदि रोग मोटापे से परोक्ष या अपरोक्ष रूप से जुड़े होते हैं।

मोटापे के दो गंभीर परिणाम होते हैं, हृदयरोग(Heart Disease) और पक्षाघात(Stroke), जो शारीरिक अपंगता और मृत्यु के बड़े कारण हैं। मोटापे से रक्तचाप बढ़ता है जो इन दोनों परिणाम का अहम कारण होता है,फिर मोटे व्यक्ति के रक्त में कोलेस्टेरॉल और टाइग्लायूसेइड्स का स्तर भी बढ़ा हुआ रहता है। जो हृदय की रक्तापूर्ति करने वाली धमनियों में अवरोध उत्पन्न करने वाला होता है। मोटा व्यक्ति में बिना किसी पूर्व लक्षण (ह्रदय शूल-Angina) के हृदयघात या लकवे के कारण आकस्मिक मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है।

मोटापे से टाइप-2 मधुमेह सीधे जुड़ी होती है। मोटे लोगों में इसके उत्पन्न होने की संभावना दुगुनी होती है। यह इसलिए क्योंकि मेदोवृद्धि से इंसुलिन हार्मोन का प्रभाव कम होने लगता है(Insuline Resistance)।

मोटे व्यक्तियों में गठिया रोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है जैसे अस्थिसंधि शोथ(Osteoarthritis) जो भार वहन करने वाले जोड़ जैसे घुटने, कूल्हे तथा निचली कमर आदि को प्रभावित करता है। वजन के बढ़ने के अनुपात में इस रोग के होने की संभावना बढ़ जाती है। मोटे व्यक्ति के रक्त में यूरिक एसिड बढ़ने से गाउट नामक अस्थिरोग होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

अन्य रोग(Other Diseases)

अन्य रोग मोटे लोगों में श्वास लेने में समस्या आती है कई बार नींद में कुछ समय के लिए श्वास रुक(Sleep Apnea) जाती है। कुछ कैंसर होने की संभावना भी मोटे लोगों में अधिक पायी जाती है जैसे स्त्रियों में गर्भाशय, डिम्बग्रंथि, गर्भाशय ग्रीह्रा, स्तन आदि के तथा पुरूषों में बड़ी आंत, मलाशय और प्रोस्टेट के कैंसर। स्त्रियों में मासिक धर्म की अनियमितता, गर्भपात या प्रसव सम्बन्धी समस्याएं भी मोटापे से ग्रस्त स्त्रियों में अधिक देखी जाती है।

मोटापे से बचाव(Prevention Of Obesity)

जो अभी मोटे तो नहीं है पर मोटापे की शुरुआत होने का अनुभव कर रहे हैं और जिनके परिवार में बड़े लोग मोटापे से ग्रस्त रहे हो उन्हें सावधान होकर उन कारणों से बचना चाहिए जो मोटापा उत्पन्न करते हैं ।जो मोटापे से ग्रस्त हो चुके हैं और इससे मुक्त होना चाहते हैं ।उन्हें निम्नलिखित पथ्य आहार-विहार का पालन और अपथ्य आहार-विहार का त्याग करना चाहिए।

मोटापा धीरे धीरे कम किया जाना चाहिए अतः उचित आहार-विहार का पालन करते हुए और इसके कारणों का त्यागते हुए धैर्य पूर्वक 5-6माह तक निम्नलिखित उपाय करने चाहिए। 

वजन घटाने वाले पेय(Weight loss Drinks)

(1).दिन में एक गिलास ठंडे पानी में नींबू निचोड़ कर इसमें 2बड़े चम्मच भर शहद डालकर पी जाएं।अति स्थूल व्यक्ति दिन में 2-3बार यह उपाय करे। 

(2).एक भाग शहद और चौगुना पानी मिलाकर प्रतिदिन प्रातः काल पीने से मोटापा नष्ट हो जाता है। प्रातः उठकर 3-4 गिलास ठंडे पानी में 1-2 चम्मच शहद घोलकर पीएं फिर शौचादि नित्य कर्म करके नाश्ते में मौसमी फल,नींबू पानी एक गिलास या थोड़े से अंकुरित अन्न खूब चबा-चबाकर कर खाएं।

(3).सोते समय एक गिलास गुनगुने गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पिएं।

(4).दिन में कभी भी एक बार गाजर,ककड़ी,टमाटर या तरबूज का रस पीएं।

(5).दो कप पानी में 10 ग्राम त्रिफला चूर्ण डालकर उबालें।जब पानी आधा कप बचे तब उतारकर कपड़े से छान कर ठंडा कर लें। इसमें 2 चम्मच शहद घोलकर सुबह खाली पेट पिएं।

उपचार(The Treatment)

वजन घटाने वाले खाद्य पदार्थ(Weight loss foods)

(1).खाने में पांच चीजों का प्रयोग करें-ककड़ी, गाजर,पत्ता गोभी, बड़ी हरी शिमला मिर्च, और सेलेरी यानी सलाद पत्ता। सुबह शाम के भोजन में अधिक में इन पांचों चीजों को जितनी अधिक से अधिक मात्रा में कच्चा ही खूब चबा-चबाकर खा सकें उतना खाएं और रोटी की मात्रा कम रखें। सलाद की ये पांचों चीजों और सब्जी जितनी ज्यादा मात्रा में खाएंगे उतना ही मोटापा कम होगा।

(2).भोजन में गेहूं की जगह जौ चने के आटे की चोकर युक्त 2 रोटी, 1कटोरी मूंग की छिलका युक्त दाल और 2कटोरी हरी शाक सब्जी(कम तेल की)लें।इसके बाद भी भूख रहती है तो कच्चे सलाद द्वारा उसे तृप्त करें। दोपहर बाद 3-4 बजे रेशायुक्त फल खाएं या किसी फल का बिना शक्कर का एक गिलास रस पिएं। शाम 7-8बजे सुबह की तरह भोजन लें। 

(3).सूर्योदय से पूर्व नित्य कर्म से निवृत्त हो प्राणायाम व योग,घूमने जाना आदि नियम से करना चाहिए।अपने दैनिक कार्यक्रम को ऐसा बनाएं जिसमें ज्यादा से ज्यादा शारीरिक श्रम हो।नजदीक के कार्यों के लिए साईकिल का और लिफ्ट की जगह सिढियों का उपयोग करने की आदत डालें। 

(4)मोटी भारी शरीर वाली स्त्री किसी को अच्छी नहीं लगती।मोटापा स्वयं व्यक्ति को शर्माता है चाहे वह स्त्री हो या अथवा पुरुष। स्त्री विशेषकर मोटी होने पर अधिक चिंतित रहती है। चिंता से उनमें अन्य रोग पैदा हो जाते हैं। दिल दिमाग भी प्रभावित हो जाता है। जिससे घर संसार का वातावरण बिगड़ जाता है।

 -भुजंगासन, वज्रासन, ताड़ासन, चक्रासन, धनुरासन किया करें।

 -खाना समय पर, हल्का चबाकर किया करें।

 -देर से हजम होने वाले मांस,अंडे मिठाइयां ना खाएं।

 -चावल, मूंग,जौ,मोठ,अरहर की दाल,कथली का उपयोग करें।

-पानी में शुद्ध शहद डालकर पीएं।

-खाना पेट भरकर कभी न खावें।

-रात्रि को खाना खाकर तुरंत न सोएं। कुछ खुली हवा में सैर किया करें

-पपीता तथा अमरूद खाया करें।

 -पेट साफ रहें इसका ध्यान रखें।

 -रात्रि को थोड़ा दूध पीकर सोया करें।

 -खूब मेहनत करें।

-अपना काम स्वयं करें।

 -चीनी का उपयोग बंद करें।

 -ईसबगोल लिया करें।

 -चंद्रप्रभावटी गोली प्रातः सायं दूध से लिया करें। चर्बी घट जाएगी, खून साफ हो जाएगा।पेट से मैल निकल जाएगा शक्ति बढ़ेगी।

मोटे व्यक्ति सेवन न करें(Fat People Don't Eat)

अपथ्य आहार-विहार(Unhealthy Diet)शक्करवाली चाय,मीठा दूध,मीठे फल जैसे केला,अंगूर,आम, मिठाईयां,मीठे फलों का रस, शीतल पेय,गेहूं की चपाती,सब्जी में भिंडी,llllo अरबी,तले हुए व घी युक्त पदार्थ,चावल,आलू आदि का सेवन भूलकर भी न करें। सप्ताह में 1 दिन उपवास रखें और उस दिन केवल फलों का और नींबू शहद का पानी का ही सेवन करें।अण्डा,मांस और शराब के बारे में चर्चा करना ही व्यर्थ होगी क्योंकि ये तो किसी भी रूप में अपथ्य आहार ही है। सूर्य उदय होने के बाद भी सोये रहना, दिन में सोना,भोजन करके तुरंत सोना,अधिक भोग-विलास और आलस्य करना आदि अपथ्य विहार हैं।

वजन घटाने की दवा(Weight loss medicine)

आयुर्वेदिक चिकित्सा(Ayurvedic Medicine)आरोग्य वद्धिनी विशेष नं.1और मेदोनिल टेबलेट 2-2 गोली सुबह व रात को सोते समय पानी के साथ निगल जाएं। यह चिकित्सा नियम से 5-6माह तक करें। शुरू में महीने 2 महीने वजन ज्यादा कम नहीं होगा पर फिर प्रतिमाह डेढ़ से 2 किलो वजन कम होने लगेगा।

हामियोपैथिक दवाओं के नाम इस प्रकार है(The Names Of Homeopathic Medicines Are As Follows)

थायराॅइडिनम,ग्रेफाइटिस,फ्युकस वेसीकुलोसस,जगलन्स रेजिआ और आयोडम।सभी दवाएं 30 शक्ति वाली लें। इसे 5-10बूंद सूर्योदय से पहले 4चम्मच पानी में डालकर पी जाएं और आधा घंटे के लिए सो जाएं फिर उठकर नित्य कर्म करें। ऐसे ही रात को सोने के लिए बिस्तर पर लेट जाएं। तब यह दवा लें और सो जाएं।

वजन घटाने के लिए व्यायाम(Exercises For Weight loss)

(1).Vajrasana(वज्रासन)


-इसको करने के लिए भूमि पर घुटने को टेककर जंघाओं को पिण्डलियों पर रखें। ओर 
-पांवों की अंगुलियों को भूमि पर रखकर एड़ियां मिली हुई हों। -अपने हाथों को अपनी जाँघों पर रखें हथेलियाँ नीचे की और श्वास अन्दर भरें और
- छाती को आगे निकालें। रीढ़ की हड्डी सीधे रखें। और कुछ गहरी साँसें लें, चार गिनती के लिए गहरी साँस लेना, और 
-धीरे-धीरे आठ तक साँस छोड़ना। आपको सिर सीधा रखना है।कमर सीधी रखनी है।

(2).भुजंगासन(Bhujangasana)

-पहले अपने पेट के बल फर्श पर लेट जाएं।अपने पैर की उंगलियों के साथ लेट जाएं, तलवे ऊपर की ओर हों; अपने माथे को जमीन पर टिकाएं।

-अपने पैरों को एक साथ पास रखें, आपके पैर और एड़ी एक दूसरे को हल्के से छूते हुए।

-दोनों हाथों को इस तरह रखें कि हथेलियां आपके कंधों के नीचे जमीन को छू रही हों, कोहनी समानांतर और आपके धड़ के करीब हो। 

-गहरी सांस लेते हुए धीरे-धीरे अपने सिर, छाती और पेट को ऊपर उठाएं। अपनी नाभि को फर्श पर रखें।

-अपने हाथों के सहारे अपने धड़ को पीछे और फर्श से खींचे। सुनिश्चित करें कि आप दोनों हथेलियों पर समान दबाव डाल रहे हैं।

-जागरूकता के साथ सांस लेते रहें, जैसा कि आप अपनी रीढ़, कशेरुकाओं को कशेरुकाओं से मोड़ते हैं। यदि संभव हो तो, अपनी पीठ को जितना संभव हो सके झुकाकर अपनी बाहों को सीधा करें; अपना सिर पीछे झुकाएं और ऊपर देखें 

-4-5 सांसों के लिए समान रूप से सांस लेते हुए मुद्रा बनाए रखें। 

-अब सांस छोड़ें और धीरे से अपने पेट, छाती और सिर को वापस फर्श पर लाएं और आराम करें।

-4-5 बार दोहराएं।

(3).Dhanurasana(धनुरासन)

-अपने पैरों के साथ अपने पेट के बल लेटें, अपने कूल्हों के साथ, और अपनी बाहों को अपने शरीर के बगल में रखें।

-अपने घुटनों को मोड़ें, अपने हाथों को पीछे की ओर ले जाएं और अपनी टखनों को पकड़ें।

-सांस अंदर लें और अपनी छाती को जमीन से ऊपर उठाएं और अपने पैरों को ऊपर और पीछे की ओर खींचें। 

-अपने चेहरे पर मुस्कान के साथ सीधे आगे देखें।

-अपनी सांसों पर ध्यान देते हुए मुद्रा को स्थिर रखें। आपका शरीर अब घुमावदार और धनुष की तरह तना हुआ है।

-इस मुद्रा में आराम करते हुए लंबी, गहरी सांसें लेना जारी रखें। लेकिन, उतना ही झुकें, जहां तक ​​आपका शरीर आपको अनुमति देता है। खिंचाव को ज़्यादा मत करो।

-15-20 सेकेंड के बाद सांस छोड़ते हुए धीरे-धीरे अपने पैरों और छाती को जमीन पर लाएं। टखनों को छोड़ें और आराम करें।

(4).Chakrasana(चक्रासन)

-जमीन पर लेट जाओ। अपने घुटनों को ऊपर उठाएं और अपने पैरों के फ्लैट जमीन पर लगाए, अपने नीचे के करीब रखें।

-अपने हाथों को अपने कंधों के पीछे, अपने कानों के पास रखें और सुनिश्चित करें कि आपकी उंगलियां बाहर निकली हुई हैं।

-अपने शरीर को तब तक समायोजित करें जब तक आप सहज न हों। अपने वजन का समर्थन करने के लिए अपने पैरों का उपयोग करके अपने निचले शरीर को ऊपर उठाएं।

-इसके बाद अपने पैरों और हथेलियों को दबाएं और अपने शरीर को ऊपर की ओर उठाने की पूरी कोशिश करें। अपने सिर को धीरे से लटकने दें।

-यहां तक ​​कि अपनी सांस बाहर भी।

-अपनी श्वास पर ध्यान केंद्रित करते हुए उस स्थिति में रहें। समान रूप से सांस लेने पर ध्यान केंद्रित करते हुए अपनी पीठ को धीरे से जमीन पर टिकाएं।

-कुछ मिनटों के लिए लेट जाएं और किसी अन्य व्यायाम या गतिविधि में वापस कूदने से पहले अपने शरीर को आराम दें ।

(5).नौकासन (नाव मुद्रा)Naukasana

-पीठ के बल लेट जाएँ और दोनों पैरों को एक साथ जोड़ लें। दोनों हाथों को शरीर के साथ लगा ले।

-एक लंबी गहरी साँस लें और साँस छोड़ते हुए हाथों को पैरों कि तरफ खींचे और अपने पैरों एवं छाती को उठाएँ।

-आपकी आँखें, हाथों कि उंगलियाँ व पैरों कि उंगलियाँ एक सीध में होनी चाहिए।

-पेट की मासपेशियों के सिकुड़ने के कारण नाभी में हो रहे खींचाव को महसूस करें।

-लंबी गहरी साँसे लेते रहे और आसन को बनाये रखें।

साँस छोड़ते हुए, धीरे से ज़मीन पर आ जाएँ और विश्राम करें।

नोट-योग किसी के निर्देशन में ही करें।गलत योग करने से आपके शरीर को नुकसान हो सकता है।

अगर आपको योग के बारे में ज्यादा जानकारी चाहिए तो नीचे लिखे आर्टिकल को देखें।

-International Yoga Day 


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