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Chakrasana

चक्रासन(Chakrasana)


चक्रासन योग(chakrasana yoga)इस आर्टिकल मेंआपको चक्रासन के लाभ, चक्रासन कैसे करें, सावधानियों के बारे में जानकारी देंगे।
योग हो या भोग-रोग दोनों में ही बाधक होता है। इन दोनों क्रियाओं को करने के लिए हमारे शरीर का रोग मुक्त होना परम आवश्यक है।रोग मुक्त होना है,तो हमें योग की शरण में जाना ही होगा।योग का मतलब है योगासन।इसलिए अनुरोध है कि आप रोज आसन करें,स्वस्थ रहे।और खुश रहें ।योग सभी के लिए न केवल शारीरिक बल्कि भावनात्मक और मानसिक स्वास्थ्य लाभ प्रदान करता है। योग आपको बीमारी , पुरानी स्थितियों से उबरने और जल्दी ठीक होने में भी मदद कर सकता है। इसके अलावा, आप अपनी विशेषज्ञता के स्तर पर ध्यान दिए बिना योग के लाभों को प्राप्त कर सकते हैं और भले ही आप चक्रासन जैसे सरल आसन करते हों!

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चक्रासन के लाभ(Benefits Of Chakrasana)

यह योगासन करने से शरीर की मांसपेशियां सुचारू ढंग से कार्य करती है,साथ ही बाजू और कलाइयों में भी नई शक्ति का संचार होता है। इसे करने से पैर,पेट और रीढ़ भी अच्छी अवस्था में पहुंचते हैं और शरीर में नई ऊर्जा का भी प्रादुर्भाव होता है।

-हाथ, पैर, रीढ़ और पेट को मजबूत करता है

-छाती खोलता है

-कंधों को फैलाता है

-हिप फ्लेक्सर्स और कोर को स्ट्रेच करता है

-ग्लूट्स और जांघों को मजबूत करता है

-रीढ़ में लचीलापन बढ़ाता है

-अवसाद को भगाने में मदद करता है यह आसन। शरीर को फुर्तीला बनाता है। यह आसन करने से हमारा शरीर काफी लचीला बनने लगता है तथा सभी अंगों में तालमेल स्थापित होने लगता है। इसे करने मात्र से जहां तनाव कम होता है, वहीं हमारा पाचन तंत्र भी बहुत अच्छा काम करने लगता है।यह आसन थायराइड के लिए लाभकारी होता है। https://youtube.com/channel/UCgk4CLLHhV9EPHn1szdvcjA



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चक्रासन में संशोधन और बदलाव(Modifications and changes in Chakrasana)

संशोधित करने के लिए(To Revise)

 यदि आप एक नौसिखिया हैं और/या आपकी रीढ़ की हड्डी में सीमित लचीलापन है, तो ब्रिज पोज़ से शुरू करें ।

चुनौती बढ़ाने के लिए (To Raise The Challenge)

धीरे-धीरे अपने हाथों को अपने पैरों के करीब ले जाएं, अपने हाथों और पैरों के बीच की दूरी को छोटा करें और पहिया के आकार की ऊंचाई बढ़ाएं । सुनिश्चित करें कि आप अपने पैरों में मजबूती से दबाते रहें और वजन को अपने हाथों की ओर ले जाएं।

चक्रासन (व्हील पोज या उर्ध्वा धनुरासन)Chakrasana (Wheel Pose or Urdhva Dhanurasana)

व्हील पोज़ - चक्रासन (चाह-क्रा-सन-आह)  या उर्ध्वा धनुरासन - जिसे फुल-व्हील पोज़ और अपवर्ड बो पोज़ भी कहा जाता है, एक बैकबेंडिंग आसन है जो छाती को खोलता है, जांघों, पेट और बाहों को टोन करता है, और संलग्न करता है पूरा शरीर। दिल खोल देने वाले खिंचाव के रूप में, यह मुद्रा उदासी और अवसाद को दूर करने में मदद करती है। इसका नाम संस्कृत के शब्दों, चक्र , जिसका अर्थ है पहिया, और आसन , जिसका अर्थ मुद्रा है, से मिलता है।

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चक्रासन कैसे करें(How to Do Chakrasana)


शुरू करने के लिए, अपनी पीठ के बल लेटें।

-धीरे-धीरे कमर को उठाना शुरू करें।

-अपने घुटनों को मोड़ें ताकि आपके पैर आपके बैठने की हड्डियों के साथ समानांतर स्थिति में फर्श पर सपाट हों, आपके कूल्हों से लगभग एक फुट की दूरी पर। अपने पैरों को फर्श पर मजबूती से दबाएं।

-सांस अंदर भरकर ग्रीवा एवं सिर को पीछे की ओर ध्यान दें।

-अपनी उंगलियों को अपने कंधों के सामने रखते हुए अपने हाथों को अपने कंधों के ठीक ऊपर फर्श पर रखें।

-अपने हाथों में दबाएं और अपने ऊपरी शरीर को चटाई से ऊपर उठाएं, अपने सिर के मुकुट को अपनी चटाई पर हल्के से टिकाएं।

-अपने पैरों में दबाएं और अपनी आंतरिक जांघों को सक्रिय करते हुए, अपने पैरों, श्रोणि और पेट को चटाई से ऊपर उठाएं।

-अपने पैरों में अधिक पुश करें, अपना अधिक वजन अपनी हथेलियों में लाएं। यह आपकी पीठ के निचले हिस्से की रक्षा करेगा।

-चटाई में मजबूती से दबाते हुए अपनी बाहों में ताकत और स्थिरता बनाए रखें।

-अपने सिर को एक तटस्थ स्थिति में लटका दें, यह सुनिश्चित कर लें कि आपकी गर्दन पर दबाव न पड़े।

-शरीर को चक्र के समान बनानें।कमर को जितना ऊपर ले जा सकते हैं, ले जाएं।

5-10सांसों के लिए रुकें।

-कुछ समय इसी स्थिति में रहें।

-मुद्रा से बाहर निकलने के लिए, धीरे-धीरे अपनी बाहों और पैरों को कम करें और अपनी रीढ़ को कशेरुकाओं द्वारा वापस चटाई पर ले आएं।

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जबकि एक नियमित योग अभ्यास से स्वास्थ्य में सुधार हो सकता है, यह जान लें कि यह चिकित्सा उपचार का विकल्प नहीं है। एक प्रशिक्षित शिक्षक की देखरेख में योग सीखना और अभ्यास करना महत्वपूर्ण है। बीमारी की स्थिति में डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही योग का अभ्यास करें। 

सावधानी(Caution)

-पीठ की समस्याएं (विशेषकर कम)

-कंधे की चोट

-गर्भावस्था

-मासिक धर्म के दौरान और उच्च रक्तचाप, चक्कर आना, मस्तिष्कवाहिकीय विकार, ग्लूकोमा या सर्वाइकल स्पाइन की समस्या होने पर इस आसन से बचें।

यह सावधानी बरतें(be careful)

-योग में विधि समय, निरंतरता,एकाग्रता और सावधानी जरूरी है।

-कभी भी आसन झटके से न करें और उतना ही करें, जितना आसानी से कर पाएं। धीरे-धीरे अभ्यास बढ़ाएं।

-योगासन करते हैं, तो फिर आपको खाने पर नियंत्रण करना भी जरूरी होता है।अगर आप अधिक कैलोरी और अधिक वसा युक्त वाला खाध-पदार्थ या फिर तेज मिर्च-मसाले वाला खाना खाते रहेंगे तो फिर योग का कोई खास असर नहीं होने वाला है।

-जब भी किसी बीमारी से छुटकारा पाने के लिए योगासन करें,तो विशेषज्ञ से पूछ कर ही करें। योग का असर तुरंत नहीं होता है। ऐसे में दवाई भी तुरंत बंद न करें।जब बेहतर लगे,जांच भी कराते रहें, फिर उसके बाद ही डॉक्टर की सलाह से दवा बंद करें।

चक्रासन चित्र(Chakrasana image)

-योगासन का असर होने में थोड़ा वक्त लगता है।फौरन नतीजों की उम्मीद नहीं करें। कम से कम खुद को छह माह का समय दें।फिर देखे असर हुआ या नहीं।

-लोग बीमारी का इलाज भी योगासन से करते हैं और फिर योगासन छोड़ देते हैं। यह समझ ले-योगासन बीमारियों का इलाज करने के लिए नहीं है, इसे लगातार करते रहे,ताकि भविष्य में आपको बीमारीयां न हों।

अन्य जानकारी के लिए हमारे साथ जुड़े रहे। आप अपनी शिकायत और सुझाव नीचे कमेंट बॉक्स में लिख सकते हैं। 






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