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Covaxin Trial On Kids

बच्चों पर कोवैक्सिन परीक्षण(Covaxin Trial On Kids)

Covaxin Trial On Kids: 12 से 18 साल तक के बच्‍चों को पहली डोज, AIIMS में ऐसे चल रहा वैक्सीन का ट्रायल(First dose to children between 12 to 18 years, trial of vaccine going on in AIIMS)

Covaxin Trial On Kids In AIIMS: 2 से 18 साल तक के बच्‍चों पर भारत बायोटेक की कोविड-19 वैक्‍सीन Covaxin का ट्रायल चल रहा है। ट्रायल में 500 से ज्‍यादा बच्‍चे शामिल होंगे।

गंभीर जांच के बाद, डीसीजीआई ने कोविड -19 पर विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है और 2-18 वर्ष की आयु पर कोवैक्सिन के चरण 2-3 नैदानिक ​​​​परीक्षण करने की अनुमति दी है।

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स्‍वदेशी कोरोना वायरस टीके का बच्‍चों पर ट्रायल शुरू हो गया है। एम्‍स दिल्‍ली, पटना समेत कई सेंटर्स पर ट्रायल चलेगा। पटना एम्‍स में 12 से 18 साल के 27 बच्‍चों को Covaxin की पहली डोज दी गई है। एम्‍स दिल्‍ली में भी मंगलवार को स्‍क्रीनिंग करने वाले बच्‍चों को वैक्‍सीन दी जा सकती है। Covaxin भारत बायोटेक की बनाई वैक्‍सीन है जिसे 18+ एजग्रुप के लिए जनवरी 2021 में आपातकालीन मंजूरी दी गई थी।

भारत के औषधि महानियंत्रक ने 13 मई को भारत बायोटेक के कोवैक्सिन को 2-18 वर्ष की आयु के बच्चों पर चरण 2-3 नैदानिक ​​परीक्षण करने की मंजूरी दी।

हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक ने पहले 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में कोवैक्सिन के चरण 2-3 नैदानिक ​​परीक्षण करने का प्रस्ताव दिया था।  परीक्षण में, कोवैक्सिन शॉट इंट्रामस्क्युलर मार्ग के माध्यम से 28 दिनों में फैली दो खुराक में दिया जाएगा।

त्वरित नियामक प्रतिक्रिया के रूप में, प्रस्ताव पर 11 मई को आयोजित कोविड -19 बैठक में विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) में विचार-विमर्श किया गया था।

समिति ने विस्तृत विचार-विमर्श के बाद कुछ शर्तों के लिए प्रस्तावित चरण 2/3 नैदानिक ​​परीक्षण करने की अनुमति देने की सिफारिश की।

इससे पहले, प्रस्ताव पर 24 फरवरी को एसईसी की बैठक में विचार-विमर्श किया गया था और फर्म को एक संशोधित नैदानिक ​​परीक्षण प्रोटोकॉल प्रस्तुत करने के लिए कहा गया था।

जून में शुरू होने वाले 2-18 आयु वर्ग के लिए कोवैक्सिन चरण 2-3 नैदानिक ​​परीक्षण, सबसे कम उम्र के प्रतिभागी 2 वर्षीय

विश्वसनीय स्रोतों के अनुसार, कोवैक्सिन का चरण 2-3 नैदानिक ​​परीक्षण, जिसे DCGI द्वारा 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग के लिए अनुमोदित किया गया है, जून में शुरू होगा।

परीक्षणों में, कोवैक्सिन को इंट्रामस्क्युलर मार्ग द्वारा दो खुराक में दिन 0 और दिन 28 पर दिया जाएगा। 

Covaxin, जिसे भारत बायोटेक द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है, का उपयोग भारत के चल रहे कोविड -19 टीकाकरण अभियान में वयस्कों पर किया जा रहा है।  इस महीने की शुरुआत में, भारत बायोटेक को 2 से 18 वर्ष के आयु वर्ग में कोवैक्सिन के चरण 2/3 नैदानिक ​​परीक्षण करने की अनुमति दी गई थी।

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भारत बायोटेक के सूत्रों ने इंडिया टुडे को बताया कि बच्चों के लिए चरण 2/3 ट्रेल्स जून में शुरू होंगे।  खुराक जून में शुरू होगी और जुलाई के मध्य तक समाप्त होगी।  भारत बायोटेक के सूत्रों ने कहा कि क्लिनिकल अध्ययन के लिए भर्ती किया गया सबसे छोटा बच्चा दो साल का है।  24 मई को कोरोनावायरस अपडेट

एम्स, दिल्ली, एम्स, पटना और मेडिट्रिना इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नागपुर सहित विभिन्न साइटों पर 525 विषयों में परीक्षण होगा।  ट्रायल में वैक्सीन इंट्रामस्क्युलर रूट से दो डोज में 0 और 28वें दिन दी जाएगी।

दिल्‍ली में आज दी जा सकती है पहली डोज(The first dose Can Be Given in Delhi Today)

एम्‍स दिल्‍ली में सोमवार को बच्‍चों पर क्लिनिकल ट्रायल के लिए स्‍क्रीनिंग शुरू हुई। पहले दिन 12 से 18 साल के करीब 30 बच्‍चों ने हिस्‍सा लिया। इन बच्‍चों के साथ उनके पेरेंट्स आए हुए थे जिनसे ट्रायल में शामिल होने को लेकर एक फॉर्म भी साइन कराया गया। एक पेरेंट ने कहा, "बड़े पैमाने पर टीकाकरण से ही कोविड-19 महामारी खत्‍म होगी। एक-एक करके सबको वैक्‍सीन लगवानी ही होगी ताकि इन्‍फेक्‍शन से बचाव हो सके।"

तीन चरणों में होगा Covaxin का ट्रायल(Covaxin will be tried in three phases)

जो बच्‍चे स्‍क्रीनिंग क्लियर कर लेंगे, हम उन्‍हें मंगलवार को ही Covaxin की पहली डोज लगा देंगे। ट्रायल में 2 से 18 साल की उम्र के 500 से ज्‍यादा बच्‍चे शामिल होंगे। यह ट्रायल तीन चरणों में होगा। पहले चरण में 12-18 साल के बच्‍चे होंगे, फिर 6-12 साल और आखिर में 2 से 6 साल के बच्‍चों पर वैक्‍सीन का ट्रायल करेंगे।

डॉ. संजय राय एम्‍स दिल्‍ली में बच्‍चों पर वैक्‍सीन ट्रायल के इंचार्ज

एम्‍स ने ही वयस्‍कों पर भी वैक्‍सीन का ट्रायल क‍िया था। तब 100 लोगों की जरूरत थी मगर 4,000 से ज्‍यादा आवेदन आए थे। एक डॉक्‍टर ने कहा, "इस बार हमने ज्‍यादा विज्ञापन नहीं दिए मगर फिर भी पेरेंट्स की तरफ से अपने बच्‍चों को ट्रायल में शामिल कराने के लिए ठीक-ठाक आवेदन आए हैं।" डॉक्‍टर ने कहा कि बच्‍चों पर वैक्‍सीन के ट्रायल को पूरा होने में छह से नौ महीने लग सकते हैं।

बच्‍चों पर वैक्‍सीन ट्रायल में क्‍या-क्‍या होता है?(What Happens in Vaccine Trials on Children)

एम्‍स पटना में ट्रायल का पहला चरण पूरा(First phase of trial completed in AIIMS Patna)

सोमवार को पटना एम्‍स में 12-18 साल के 17 बच्‍चों को पहली डोज दी गई। इन बच्‍चों को दो घंटे तक डॉक्‍टर्स की निगरानी में रखा गया। कोई साइड इफेक्‍ट्स नजर न आने पर उन्‍हें घर जाने दिया गया। यहां कुल मिलाकर 27 बच्‍चों को पहली डोज मिली है। पटना में 3 जून को बच्‍चों पर ट्रायल शुरू क‍िया गया था।

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बच्‍चों के लिए अबतक कोई वैक्‍सीन नहीं(No vaccine for children yet)

भारत में 18 साल या उससे ज्‍यादा उम्र वालों के लिए तीन टीकों को मंजूरी दी गई है। इनमें Covaxin के अलावा Covishield और Sputnik V शामिल हैं। हालांकि बच्‍चों के लिए अभी तक किसी वैक्‍सीन को मंजूरी नहीं मिली है। अमेरिका और ब्रिटेन में फाइजर की वैक्‍सीन को 12 साल से ज्‍यादा उम्र के बच्‍चों पर इस्‍तेमाल की हरी झंडी दी जा चुकी है। भारत बायोटेक को पिछले महीने अपनी वैक्‍सीन के बच्‍चों पर ट्रायल की मंजूरी दी गई थी।

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