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Summer diet

 1.ग्रीष्मकालीन आहार(Summer diet)

गत कुछ वर्षों से हमारे देश में गर्मी का प्रभाव और समय बढ़ता जा रहा है तथा शीतलतायुक्त समय कम होता जा रहा है।उन्नति, विकास और आधुनिकता के नाम पर हम प्रकृति से निरंतर दूर होते जा रहे हैं। जब हमारा आहार-विहार प्रकृति के नियमों के अनुसार और प्रकृति के अनुरूप नहीं रहता।तब हमारा शरीर न तो स्वस्थ रह पाता है और न ही वह रोगों से लड़ने की अपनी क्षमता को बरकरार रख पाता है। शीतकाल का समय जहां प्राकृतिक रूप से स्वास्थ्य और बल की वृद्धि करने वाला होता हैं वही ग्रीष्मकाल में हमें स्वास्थ्य की रक्षा करने के प्रति सतर्क रहना होता है क्योंकि हमारे स्वास्थ्य का दारोमदार हमारे द्वारा ग्रहण किए गए आहार के ठीक-ठीक पाचन पर रहता है और गर्मी के मौसम में स्वाभाविक रूप से हमारी पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है। ऐसे में अनुचित आहार का सेवन करना और पथ्य आहार का सेवन न करने से पाचन  प्रक्रिया विकार ग्रस्त हो जाती है जिसका दुष्प्रभाव पूरे शरीर पर पड़ता है। गर्मी के मौसम में कौन से खाद्य पदार्थ हमारे शरीर और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं तथा किन पदार्थों का इन दिनों परहेज करना चाहिए, इस विषय पर उपयोगी जानकारी यहां प्रस्तुत की जा रही है। 

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(1).बाहरी वातावरण के तापमान में वृद्धि हमारे शरीर के आंतरिक वातावरण को प्रभावित करती है, खासतौर पर हमारी भूख व कार्यक्षमता तथा हमारे स्वास्थ्य पर इसका विपरीत प्रभाव पड़ता है। यह तो हम सभी जानते हैं और सभी का यह अनुभव भी है कि शीतकाल यानी ठंड के दिनों में हमारी पाचन शक्ति बेहतर रहती है जिसकी वजह से हम, इन दिनों में, कैसा भी आहार चाहे वह गरम मसालेदार भोजन हो या फिर मिठाईयां, अच्छी तरह से खा पचा लेते हैं। शादी-पार्टियों में देर रात खाये गये लजीज व गरिष्ठ व्यंजनों को  भी हजम कर शरीर का सेहतमंद बने रहना ठंड के मौसम की विशेषता होती है लेकिन गर्मी का मौसम ठीक इसके विपरीत होता है अतः आहार प्रबंधन में आवश्यक बदलाव जरूरी होता है।

(2).गर्मी के दिनों में शरीर का तापमान बढ़ने से पसीना अधिक आता है जिससे शरीर में जल यानी नमी के साथ-साथ इलेक्ट-लाइट्स के स्तर में कमी आने लगती है। पोषण की दृष्टि से देखे तो जल का कोई महत्व नहीं है लेकिन यह सिर्फ हमारी प्यास बुझाने वाला पदार्थ नहीं है बल्कि जल हमारे शरीर में कोशिकाकीय स्तर पर चयापचय संबंधी विभिन्न प्रक्रियाओं में एक उत्प्रेरक की भूमिका निभाता है। यदि गर्मी के प्रभाव से हमारे शरीर में हो रही जल की कमी की हम पूर्ति नहीं करते हैं तो शरीर की बहुत सी प्रक्रियाएं प्रभावित होने लगती है और शरीर का स्वास्थ्य बिगड़ने लगता है। कहने का तात्पर्य यह है कि गर्मी के दिनों में हमें सिर्फ पानी ही अधिक मात्रा में नहीं पीना होता है बल्कि अपने आहार में ऐसे भोज्य पदार्थों का समावेश भी करना होता है जिनमें पानी के साथ-साथ खनिज लवण भी पर्याप्त मात्रा में हों। फिर चूंकि इन दिनों में पाचन शक्ति नैसर्गिक रूप से कमजोर रहती है अतः दिन व रात का भोजन हल्का, पौष्टिक और सुपाच्य हो इसका भी ध्यान रखना होता है। चूंकि गर्मी के दिनों में भी सक्रिय बने रहने के लिए ऊर्जा व प्रोटीन की आवश्यकता तो रहती है अत इनकी आपूर्ति के लिए दालें,फलियां,साबुत अनाज से बने अर्धतरल व्यंजनों को आहार में शामिल करना चाहिए। गर्मी के मौसम में उत्तम भोज्य पदार्थों में आते हैं-गेहूं,जौ,ज्वार आदि अन्न, विभिन्न प्रकार की पत्तेदार सब्जियां, ताजी रसीले फल, सलाद, अंकुरित अनाज आदि जो शरीर में नमी को बनाये रखने के साथ-साथ आवश्यकता विटामिन्स व खनिज लवणों की क्षतिपूर्ति भी करते हैं गर्मी के दिनों में दही व दही से बने व्यंजनों का सेवन विशेष हितकारी होता है।दही का सेवन केवल शारीरिक वजन को कम करने में ही उपयोगी नहीं होता बल्कि इसके सेवन से शरीर को  अच्छी मात्रा में प्रोटीन और कैल्शियम भी प्राप्त होते हैं। इसमें पाये जाने वाले सक्रिय जीवाणु, जिन्हें चिकित्सकीय भाषा में प्रोबायोटिक्स कहा जाता है,शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि करने के साथ-साथ पाचन तंत्र मार्ग को भी स्वस्थ रखते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि पोषक तत्वों की आपूर्ति के साथ-साथ आंतों की पाचन क्षमता में वृद्धि करने हेतु दही या छाछ का अन्य कोई विकल्प नहीं। भुना हुआ जीरा, थोड़ी सी पीसी काली मिर्च और स्वादानुसार सेंधा नमक मिलाकर बनाये हुए सादे दही, छाछ या रायता न केवल भोजन के स्वाद और उसकी विभिन्नता को बढ़ाने वाले होते हैं बल्कि बढ़ते हुए तापमान से उत्पन्न होने वाली पाचन सम्बंधी समस्याओं से भी बचाव करने वाले होते हैं।

(3).गर्मी के दिनों में प्राकृतिक रूप से शीतलता पहुंचाने वाले तथा जिनमें पानी की अधिक मात्रा हो ऐसे आहारीय पदार्थों का सेवन करना चाहिए। फलों मे तरबूज,खरबूज,संतरा,मौसम्बी,अनानास,शहतूत ,फालसा आदि महत्वपूर्ण होते हैं। सब्जियों में पतली ककड़ी, खीरा ककड़ी,

टमाटर,प्याज, सलाद पत्ता,पत्तेदार सब्जियां,कच्चा आम,हरा धनिया,पुदीना आदि उल्लेखनीय हैं।सब्जियों से बने सलाद व

सूप,फलों के रस, मिल्क शेक, कच्चे आम का पन्ना, लौकी का हलुआ (कपूर कन्द), नींबू की शिकंजी,नींबू पानी, नारियल पानी तथा विभिन्न प्रकार की हरी चटनियां आदि का इस मौसम में सेवन करने से शरीर की नमी ही बरकरार नहीं रहती बल्कि आवश्यक खनिज लवणों की आपूर्ति भी हो जाती है।दरअसल पर्याप्त मात्रा में तरलीय पदार्थों का सेवन हमारे शरीर को गर्मी से होने वाले दुष्प्रभाव जैसे लू लगना आदि से बचाता है। यही कारण है कि हमारे देश में गर्मी के मौसम में परंपरागत रूप से छाछ, दही की लस्सी, ठंडाई, केरी का पना तथा विभिन्न प्रकार के शीतलता देने वाले शर्बतों से घर आने वाले मेहमानों का स्वागत किया जाता है। हां,देसी फास्ट फूड यानी 'सत्तू' का सेवन, इस मौसम में, बिन भूले करना चाहिए। यह स्वादिष्ट,पौष्टिक और स्वास्थ्य बनाये रखने वाला खाद्य पदार्थ हैं। चूंकि प्यास को शांत करने का सबसे उत्तम उपाय जल ही होता है अतःइस मौसम में आवश्यकता के अनुसार जल की मात्रा बढ़ाना न भूलें।

(4).यह तो चर्चा हुई पथ्य आहार की यानी अन्य खाद्य पदार्थों की जिनका सेवन गर्मी के दिनों में करना लाभदायक ही नहीं आवश्यक भी है।आइए अब उन खाद्य पदार्थों के विषय में भी बात कर ले जिनका सेवन या तो कम मात्रा में करना चाहिए या फिर बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए जो भोज्य पदार्थ स्वाभाविक रूप से शरीर में उष्णता बढ़ाते हैं उनका सेवन इस मौसम में नहीं करना चाहिए, जैसे तले हुए व अधिक मिर्चमसालेदार व्यंजन, मांसाहार व अंडा, पिज्जा-बर्गर आदि फास्ट फूड,शराब,चाय,काफी या कैफीन युक्त व कार्बोनेटेड पेय जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, अदरक,लौंग, लहसुन आदि।

(5). कैफीन युक्त या कार्बोनेटेड पेय पदार्थ तथा बाजार में बने बनाए मिलने वाले अधिक शर्करायुक्त पेय आदि का गर्मी के दिनों में सेवन न करना ही बेहतर होता है। इन पेय पदार्थों में प्रिजरवेटिव्स तथा रंग मिले होते हैं। ये प्रकृति से अम्लीय होते हैं तथा मूत्रल पदार्थ की तरह कार्य करते हैं जिससे मूत्र त्याग बढ़ जाता है और शरीर से तरल पदार्थ बाहर निकलने लगता हैं। कुछ साफ्ट डी-न्क्स (कोल्ड ड्रिंक) में घुला हुआ फास्फोरिक एसिड होता है जो गर्मी के दिनों में स्वाभाविक रूप से कमजोर पाचन तंत्र को और गड़बड़ा देता है।बहुत से लोग गर्मी से निजात पाने के लिए कोल्ड ड्रिंक का अत्यधिक सेवन करते हैं जिससे रक्त में फास्फोरस का स्तर बढ़ जाता है और इसके प्रभाव से हड्डियों में से कैल्शियम निकल कर रक्त  में आने लगता है और अस्थियां कमजोर होने लगती है इतना ही नहीं,कोल्ड ड्रिंक्स के अधिक सेवन से शरीर में खनिजों का स्तर भी कम होने लगता है जिससे शरीर की एन्जाइम्स अपने कार्यों को ठीक तरीके से नहीं कर पाती है।बहुत ठंडे पेय पदार्थ के पीने से थोड़ी देर तो अच्छा लगता है पर अनंत यह शरीर में गर्मी बढ़ाने वाला होता है क्योंकि इसके सेवन से त्वचा की रक्तवाहिनीयों में संकुचन होता है और गर्मी को बाहर निकालने वाली शारीरिक प्रक्रिया बाधित होती है। अंत में संक्षिप्त चर्चा गर्मी के दिनों में ज्यादातर होने वाली एक शारीरीक समस्या, जिसे 'लू लगना' कहते हैं,

 जो व्यक्ति लू से संतृप्त हो गया हो उसे ठंडे स्थान पर लेटाना चाहिए तथा शरीर में पानी और खनिज लवणों की क्षतिपूर्ति के लिए इलेटाँल या नींबू पानी, शर्बत, कच्चे आम का पना, पुदीना युक्त पानी आदि थोड़ी-थोड़ी देर में कम-कम मात्रा में पिलाते रहना चाहिए। लू से बचने के लिए इन दिनों खाली पेट घर से बाहर न निकले, खाने में एक बड़े कच्चे प्याज का सेवन रोज करें, घर से निकलते समय नींबू पानी या आम का पन्ना पीकर ही निकलें तथा ज्यादा समय सीधी धूप में न तो रहें और न ही कोई कार्य करें। 

 ऊपर चर्चा की गई बातों को अमल में लाते हुए पर्याप्त नींद और शारीरिक विश्राम द्वारा गर्मी के इस मौसम में भी आप अपने आपको स्वस्थ, प्रसन्नचित्त और कार्य सक्षम बनाये रखने में सफल हो सकते हैं।

2. ग्रीष्म ऋतु के फल (Summer season fruits
Summer season fruits

गर्मी के दिनों में शरीर में पर्याप्त नमी बनी रहे यह बहुत जरूरी होता है। वैसे तो आजकल बहुत से ऐसे फल है जो पूरे साल उपलब्ध रहते हैं जैसे सेव, केला आदि किंतु  गर्मी का मौसम शरीर को जलाने वाली धूप के साथ-साथ स्वास्थ्यवर्धक और गर्मी के प्रभाव से शरीर को बचाने वाले फलों की सौगात भी लेकर आता है।

 इन मौसमी फलों में मुख्य है- अनानास, तरबूज, खरबूज,आम, स्ट्रॉबेरी ,फालसा ,शहतूत आदि ।यह फल हमारी स्वादेन्द्रिय को ही संतुष्ट नहीं करते बल्कि हमारे आहार को भी संतुलित करते हैं क्योंकि इनमें महत्वपूर्ण जीवनीय तत्व जैसे विटामिन्स और खनिज लवण के साथ-साथ रोगों से बचाने वाले रसायन और एन्टीआक्सीडेंट्स भी होते हैं ।

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आइए ग्रीष्मकाल में उपलब्ध होने वाले कुछ फलों से मिलने वाले स्वास्थ्य लाभ पर थोड़ी चर्चा करते हैं।प्रत्येक ऋतु में सेवन योग्य तरह-तरह के फल प्रकृति स्वयं ही पैदा करती है जिन्हें मौसमी फल कहा जाता है। ग्रीष्म ऋतु में सेवन योग्य फलों में मौसमी,मीठे संतरे,पका केला,मीठे अंगूर,पका तरबूज, मीठा खरबूज, हरी पतली ककड़ी, मीठे आम,शहतूत, चीकू आदि फलों के नाम उल्लेखनीय हैं।

(1).तरबूज(watermelon)

 गर्मी के मौसम में आने वाला यह फल सिर्फ हमारी प्यास बुझाने और शरीर में तरावट लाने का कार्य ही नहीं करता है बल्कि बीटा- केरोटिन,विटामिन सी, लाइकोपिन, पोटेशियम और आयरन जैसे महत्वपूर्ण तत्वों की आपूर्ति करने वाला भी होता है।

(2). बेरीज(Berries)

  इस वर्ग के बहुत से प्रकार के फल गर्मी के दिनों में उपलब्ध होते हैं। स्टोबेरी (हिसालु), ब्लैकबेरी(फालसा) आदि फलों में पाये जाने वाले रसायन हमारे हृदय और रक्तवाहिनियों के तंत्र को स्वस्थ रखने वाले कैंसर जैसे घातक रोग से बचाव करने वाले होते हैं।

(3). पपीता व आम(Papaya and Mango)

 इन दोनों में बीटा-केरोटिन, विटामिन Cऔर A तथा रेशे की अच्छी मात्रा होती हैं।पर्याप्त मात्रा में मीठे आमों का सेवन करने से महीनों तक की आवश्यकता पूरी करने वाला विटामिन A

 का संचय शरीर में हो जाता है।आम में बायोफ्लेवोनाइड्स भी   प्रचुर मात्रा में होते हैं जो केरोटीन के साथ मिलकर हमारी रोग प्रतिरोधक क्षमता को स्वस्थ रखते है। आम से शरीर को पोटेशियम भी अच्छी मात्रा में प्राप्त होता है।

(4).अनानास(Pineapple)

 इस फल में विटामिन्स और खनिज लवणों की प्रचुर मात्रा होने के साथ-साथ ब्रोमेले न(Bromelain) नामक एक एंजाइम भी होता है जो प्रोटीन्स के पाचन में सहयोगी होता है।

3. गर्मी से बचाव करने वाले पेय(Heat shielding drinks)

पेय पदार्थ(Drinkable item
Drinkable item

                Drinkable item

इस ऋतु में पेय पदार्थ का बहुत महत्व है और उपयोग भी क्योंकि उचित और ऋतु अनुकूलन पेय पदार्थों का सेवन करने से,ग्रीष्म ऋतु के प्रभाव से शरीर की रक्षा होती है और शरीर में तरावट और शक्ति बनी रहती है। शीतल और तरावट वाले पदार्थों व पेयों से तात्पर्य आइसक्रीम,कोल्ड ड्रिंक,फ्रिज में रखा पानी या बाजारू शीतल पेय पदार्थों से नहीं है जो जरा सी देर के लिए ही तो ठंडक देते हैं पर शरीर और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक सिद्ध होते हैं। निरापद और गुणकारी पेय घर पर ही तैयार किये जा सकते हैं।

गर्मी के दिनों में गर्मी से निजात पाने के लिए तथा गर्मी के शरीर पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव से बचने के लिए फ्रिज का ठंडा पानी या कोल्डड्रिंक आदि के स्थान पर नीचे दिये गये किसी भी पेय का सेवन करना चाहिए क्योंकि ये पेय स्वास्थ्य रक्षक भी हैं और स्वास्थ्यवर्धक भी है-

 (1).मसाला लस्सी(Masala Lassi)

 ताजा दही 2 कप, बारीक कटा धनिया 4 चम्मच, बारीक कटा हुआ पुदीना 2 चम्मच, पिसी सौंफ व जीरा 1 चम्मच, थोड़ा-सा सेंधा नमक व थोड़ी सी शक्कर। सबसे पहले दही को अच्छे से मथ लें।यदि दही गाढा़ हो तो उसमें आवश्यकता अनुसार पानी मिला लें ।फिर इसमें सारे पदार्थ मिलाकर अच्छे से मिला लें। गर्मी में बाहर निकलने से पहले इस लस्सी का एक गिलास सेवन करें।

(2).आम पन्ना(Mango Panna)

5-6 मध्यम आकार के कच्चे आम (केरी),शक्कर 6 चम्मच ,सेंधा नमक 1चम्मच, काला नमक आधा चम्मच, जीरा पाउडर 2 चम्मच, बारीक कटा हुआ पुदीना 4 चम्मच,लाल मिर्च पाउडर आधा चम्मच या कटी हुई हरी मिर्च2-3(ऐच्छिक)।कच्चे आमों को छील कर एक बर्तन में 15 से 20 मिनट धीमी आंच पर पकाएं।फिर इनके को उसी पानी में डालकर पीस लें।यह मिश्रण फ्रिज मे रखने पर काफी दिनों तक खराब नहीं होता है।जब भी आम पना पीना हो तब इसको एक गिलास में एक चौथाई भरे तथा उसमें बर्फ के टुकड़े डाल कर पानी से पुरा गिलास भर दें।अच्छे से मिलाकर सेवन करें।

(3).पुदीना तरबूज(Peppermint melon)

तरबूज के बीज निकले हुए छोटे टुकड़े 3 कप, कटी हुई पोदीना आधा कप, शकर 3 चम्मच, काला नमक 1 चम्मच। तरबूज के टुकड़े पुदीना, नमक व शकर को अच्छे से मिलाकर प्रतिनिधित्व में घुमा लें। फिर इसे एक गिलास में बर्फ डालकर सेवन करें। यह शीतलता देने के साथ-साथ खनिज लवणों की आपूर्ति कर गर्मी में भी घर में भी पानी रहता है।

4.ग्रीष्मकालीन सब्जियां(Summer vegetables)

(1).दाल(lentils)

दालों में छिलके वाली  मूंग की दाल और मसूर की दाल खाना चाहिए क्योंकि ये पचने में हल्की और पेट के लिए अनुकूल होती है।अरहर(तुअर) की दाल खाएं तो चावल भी खाएं या शुद्ध घी का तड़का लगाकर खाएं इससे दाल की खुश्की और अम्लता खत्म हो जाती हैं।

Vegetable Vegetable

               Vegetable Vegetable

(2).शाक सब्जी(Vegetable Vegetable)

इस ऋतु में लौकी (आल या गढे़ली), गिलकी(चिकनी तोरई),पके लाल टमाटर,छिलका युक्त आलू, हरे मटर,चने की सूखी भाजी, बथुआ,चौलाई,परवल,करेला,कच्चे केले, तरबूज के सुखाये हुए छिलके, सहजना की फली की सब्जी का सेवन करना चाहिए।

5.सूखे मेवे(dry fruits)

(1)  मुनक्का,किशमिश, चिरौंजी, पिंड खजूर, का सेवन ग्रीष्म ऋतु में हितकारी रहता है।

6.अन्य पदार्थ(Other substances)

(1).आगरे का पेठा, गुलकंद, दूध चावल की खीर, मलाई,शुद्ध घी, रबड़ी,मीठा दूध आदि का सेवन करने से इस ऋतु मे 'घृतं पयः सशाल्यत्रं भजन् ग्रीष्मे न सीदति'(चरक संहिता)के अनुसार शरीर के स्वाभाविक बल में कमी नही होती।

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ग्रीष्म ऋतु में सुबह सूर्योदय होने से पहले तीन काम कर लेना चाहिए। पहला- ठंडा पानी पीकर उषा पान करना। दूसरा- मल विसर्जन करके स्नान करना। तीसरा-वायु सेवन करने के लिए कम से कम 3 किलोमीटर तक घूमना। ग्रीष्म काल में रातें छोटी होती है इसलिए जल्दी सोना और जल्दी उठना हितकारी होता है। इस ऋतु में तेल मालिश अवश्य करना चाहिए। इसके लिए चन्दबला लाक्षादि तैल, जैतून का तेल या नारियल का तैल में से किसी का प्रयोग किया जा सकता है। सोने के पहले मल विसर्जन करना चाहिए, इससे वात(गैस)और पित्त (एसिडिटी) का प्रकोप नहीं होता और सुबह मल विसर्जन होने में विलंब नहीं होता। 


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