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Grapes Benefits

 1.अंगूर(Grapes)
अंगूर के फायदे(Grapes Benefits)

Grapes Benefits
                                Grapes Benefits

हमारे शरीर का स्वास्थ्य बना रहे तथा उसकी रोगों से रक्षा भी हो सके इसके लिए यह आवश्यक हो जाता है कि हम अपने आहार में अधिक से अधिक हरी पत्तेदार साग- सब्जियों तथा फलों को का प्रयोग करें। इसके लिए इस बात की जानकारी होना आवश्यक है कि कौन-कौन से आहारीय द्रव्य हमारे शरीर को स्वास्थ्य ही नहीं रखते बल्कि उसके स्वास्थ्य की रक्षा भी करते हैं यानी रोगों से बचाव भी करते हैं। इसी उद्देश्य से, इस लेख के द्वारा, हम तृप्ति और तरावट देने के साथ-साथ सभी का पोषण और रोगों से रक्षा करने वाले एक फल 'अंगूर' के विषय में उपयोगी विवरण आपके समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।

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अंगूर से तो हम सभी का परिचय है लेकिन इसके गुणों का और प्रयोगों के विषय में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है।हमारे देश में बहुत प्राचीनकाल से इस फल का उपयोग होता आ रहा है।चरक, सुश्रुत,वाग्भट,भावप्रकाश इत्यादि प्रमाणित आयुर्वेदिक ग्रंथों में इस फल की काफी प्रशंसा की गई है।अंगूर एक बलपुष्टिदायक, रक्तशोधक ,वीर्यवर्द्धक,रक्तवर्द्धक, तरावट व तृप्ति देने वाला उत्तम फल है। इसे किसी भी ऋतु में यानी जब भी उपलब्ध हो तब इसका खूब सेवन करना चाहिए। अलग-अलग अवस्थाओं में इसे अलग-अलग नामों से पुकारा जाता है। तो इस फल के गुण,परिचय, उपयोग व लाभ और घरेलू उपयोग से सम्बन्धित विवरण प्रस्तुत है।

2.भाषा भेद से नाम भेद(Distinguishing names from language differences)

(1).संस्कृत -द्राक्षा

(2).हिंदी-दाख,अंगूर

(3).मराठी-द्राक्ष 

(4). गुजराती-दराख

 (5).बंगला-आंगूर, मेनका 

 (6).तेलुगु-द्राक्षा 

 (7).कन्नड़-द्राक्षे

(8). तामिल-कोडिमडि

 (9).फारसी-अंगूर रजताफ, मवेका

(10). इंग्लिश-ग्रेप(Grape)

 (11).लैटिन-वाइटिस विनिफेरा लिन(Vinifera Linn)

3.गुण(A quality)

पका हुआ मीठा अंगूर दस्तावर, शीतलता देनेवाला, नेत्रों के लिए हितकारी, पुष्टिकारक,भारी,पाक एवं रस में मधुर,स्वर को उत्तम करने वाला,कसैला,तृप्तिदायक,मल-मूत्र की प्रवृत्ति करने वाला, वृष्य(टॉनिक),वीर्यवर्द्धक,कफ तथा रूचिकारक होता है। यह तृषा ज्वर, श्वास, खांसी,वात,वातरक्त,कामला (पीलिया), पेशाब की रुकावट,रक्तपित्त,जलन, शोथ और मदात्यय रोग आदि में लाभ करता है। कच्चे अंगूर में ये  गुण नहीं होते और खट्टा अंगूर हानिकारक होता है ।ताजा और मीठा और रक्त को पतला करने वाला, छाती के रोगों में गुणकारी,जल्दी पचने वाला,रक्तशोधक और रक्तवर्धक होता है।

 4.परिचय(introduction)

अंगूर एक सुपरिचित फल है फिर भी इसके विषय में कुछ जानकारी देना जरूरी है ताकि इसकी गुणवत्ता और उपयोगिता सें पाठकगंण परिचित हो सकें।यह द्राक्षा(Vitaceae) कुल का फल है। वास्तव में अंगूर,द्राक्षा, मुनक्का,किशमिश सब एक ही जाति की लता से होने वाले फल है जो कच्चे,पके हुए बीजहीन, छोटे,बड़े,सूखे हुए आदि विभिन्न रूप और अवस्था के कारण ही अलग-अलग नामों से पुकारे जाते हैं। अंगूर मूलतः फारस व अफगानिस्तान देशों की उपज है पर अब तो भारत सहित पूरी दुनिया में इसकी फसल होती है। 

5.काले अंगूर के फायदे(Black grapes benefits)

Black grapes benefits
              Black grapes benefits

आजकल अंगूर की कई किस्मों का उत्पादन होने लगा है फिर भी इसे मोटे तौर पर हरे,लाल और काले अंगूर में बांटा जा सकता है। काले रंग के अंगूर के एक प्रकार को हब्शी अंगूर कहते हैं।यह जामुन के समान गहरे बैंगनी व काले रंग का और चमकदार होता है जो स्वाद में बहुत मीठा होता है दूसरे प्रकार का काला अंगूर हल्के बैंगनी रंग का तथा हब्शी अंगूर से कम मीठा होता है। हरे प्रकाश के अंगूर में एक प्रकार का अंगूर पिटारी का अंगूर कहलाता है जो सबसे बड़ा, लंबा और बहुत मीठा होता है और हरे अंगूरों में सबसे अच्छा माना जाता है। एक प्रकार का हरा अंगूर आकार में सबसे छोटा,मगर बहुत मीठाऔर बीज रहित होता है अतः बेदाना कहलाता है। पके अंगूर को लता पर ही सुखाकर मुनक्का (दाख) बना लेते हैं। काले रंग के अंगूर काली मुनक्का, पिटारी के अंगूर की लाल मुनक्का और बेदाना अंगूर की किशमिश बनती है। अंगूर युवावस्था है तो किशमिश अंगूर का बुढ़ापा है यानी अंगूर दोनों अवस्थाओं में गुणकारी और उपयोगी बना रहता है। यह बात किसी शायर ने इस ढंग से कही है-

 क्या खूब रंग लाया है माशूक का बुढ़ापा 

 कि अंगूर के सब मजे किसमिस में आ गये

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6.रासायनिक संगठन(Chemical organization)

 ताजे अंगूर में आर्द्रता 72.8 से 77.2 प्रतिशत,भस्म 0.36 0.64 प्रतिशत,अम्लता 0.23 से 0.53 प्रतिशत,शर्करा 15.69 से 18.66प्रतिशत होती है।इनके अलावा द्राक्षशर्करा(ग्लूकोज), गोंद,कषाय द्रव्य, टार्टरिक, साइट्रिक, रैसेमिक व मैलिक एसिड्स,सोडियम और पोटेशियम क्लोराइड, पोटेशियम सल्फेट, मैग्नीशियम, फिटकरी,लौहा, थोड़ा एल्ब्यूमिन आदि भी होते हैं। मुनक्का में कैल्शियम, मैग्नीशियम,पोटेशियम, फॉस्फोरस और लौह के अलावा गोंद व शर्करा भी होते हैं।

7.उपयोग एवं लाभ(Uses and Benefits)

 फलों के अंदर अंगूर सबसे अच्छा और निर्दोष फल है इसलिए इसका उपयोग रोगी भी कर सकता है और निरोगी भी। यह सभी प्रकृति के व्यक्तियों के लिए अनुकूल सिद्ध होता है। बच्चे,जवान,वृद्ध, स्त्री-पुरुष,गर्भवती,शिशु को दूध पिलाने वाली स्त्री,कमजोर,बलवान,रोगी,निरोगी,योगी,भोगी-सभी के लिए अंगूर उपयोगी सिद्ध होता है। स्वस्थ व्यक्ति के लिए यह पोष्टिक उत्तम खाद्य है तो अस्वस्थ के लिए अत्यंत बलवर्धक पथ्य हैं।जिन रोगों में कोई भी पदार्थ खाने या पीने को नहीं दिया जाता उनमें भी अंगूर या दाख(मुनक्का) का सेवन कराया जा सकता है। इसे अल्पाहार में नाश्ते के रूप में या भोजन के साथ भी खा सकते हैं और निराहार रहकर जो उपवास करते हैं वे भी खा सकते हैं। कहने का तात्पर्य यह है कि अंगूर एक बहुत ही उपयोगी फल है जिसका सेवन कोई भी, कभी भी, कैसे भी कर सकता है या इसका रस निकालकर पी सकता है ।

8.प्राचीन मत(praacheen mat)

आयुर्वेदिक और यूनानी पद्धति से बनाये जाने वाले कुछ पौष्टिक और बलवीर्यवर्द्धक नुस्खों  में ताजे अंगूर का प्रयोग बहुतायत में किया जाता है। चरक संहिता के सूत्रस्थान में 

अंगूर के विषय में कहा गया है-

तृष्णादाहज्वरश्वास रक्तपित्त क्षत क्षयान् ।

वात पित्त मुदावर्तं स्वरभेदं मदात्ययम्।।

तिक्तास्यातामास्यशोषं कासं चाशु व्यपोहति।

अर्थात् अंगूर और मुनक्का-

दोनों अवस्थाओं में यह फल प्यास,अंतर्दाह,ज्वर,दमा, रक्तपित्त,उर:क्षत, क्षयरोग,मुख में तिक्त रस का होना, मुख सूखना और कास (खांसी)- इन व्याधियों को दूर करने वाला तथा मांसवर्द्धक,शुक्रवर्द्धक,रस में मधुर, स्निग्ध और  शीतवीर्य है।

अतः इन सभी व्याधियों को दूर करने में इसका सेवन उपयोगी होता है। वैसे किसी भी रोग के रोगी के लिए अंगूर, पथ्य और शक्ति-स्फूर्ति देने वाला होने से एक अत्यंत उपयोगी फल है ‌

 इसका उपयोग आसव, सिरका व मध के निर्माण में  किया जाता है आयुर्वेदिक योग द्राक्षासव, द्राक्षारिष्ट,अंगूरासव, अंगूर का शरबत आदि में इसका उपयोग किया जाता है।

 9.विटामिन(vitamins)
आधुनिक मत(aadhunik mat)

 आधुनिक चिकित्सा पद्धति के वैज्ञानिकों ने अंगूर को बहुत लाभकारी और रोगों से बचाने वाला फल बताया है। उनके अनुसन्धानों  के अनुसार अंगूर में कई पोषक तत्व होते हैं। यह कम उर्जा (कैलोरी) वाला परंतु पोषक तत्वों की पर्याप्त आपूर्ति करने वाला फल है।

 इसमें कई प्रकार के एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिनमें मुख्य है- फ्लेवोनाॅइड्स,कैरोटीनाॅइड्स,रेसवरट्राल(Resvertol), मेलाटोनिन,मेंग्नीज, विटामिन Cआदि। इनके अलावा विटामिन के K,B1,B6 और पोटेशियम भी अच्छी मात्रा में होते हैं। अंगूर के नियमित सेवन करने से, इन तत्वों के कारण, हमारे हृदय एवं रक्त वाहिनियों के तंत्र, श्वसन तंत्र, रोग प्रतिरोधक तंत्र, तंत्रिका तंत्र आदि लाभान्वित होते हैं। जब भी यह फल उपलब्ध हो तब कम से कम 30-40 अंगूर प्रतिदिन सेवन करना चाहिए। आइए अब इस फल के स्वास्थ्यवर्धक और रोगों से बचाव करने वाले प्रभाव पर चर्चा करते हैं।

हमारे शरीर में चयापचय और ऑक्सीकरण की प्रक्रिया सतत चलती रहती हैजिससे ऑक्सीजन के अतिसक्रिय अणु तथा स्वतंत्रमुलक(Free radicals) की उत्पत्ति होती रहती है। यदि ये समय से नष्ट नहीं होते हैं तो शरीर में एक शरीर क्रियात्मक तनाव उत्पन्न हो जाता है जिसे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस(Oxidative stress) कहते हैं।अंगूर का नियमित सेवन इस तनाव से हमारे शरीर को बचाता है। इसमें पाए जाने वाले विभिन्न एंटीऑक्सीडेंट्स चयापचय से उत्पन्न मुल्कों को नष्ट करते हैं तथा ऑक्सीजन संबंधी एन्जाइमस जैसे जैन्थीन ऑक्सीडेस तथा केटालेज को अति सक्रिय होने से रोकते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट्स अंगूर के छिलके व बीजों में प्रचुर मात्रा में होते हैं, इसके गूदे में इनकी मात्रा बहुत कम होती है यानी अंगूर को पूरा छिलके व बीजों सहित खाना चाहिए। अंगूर में ऐसे तत्व भी होते हैं जो शोथ (सूजन) को उत्पन्न होने से रोकते है।हमारे शरीर में शोथ प्रक्रिया को उत्पन्न करने वाले रसायन जैसे इन्टरल्यूकिन-6 आदि की सक्रियता को ये तत्व कम करते हैं और साथ ही सूजन उत्पन्न करने वाली एंजाइम्स के उत्पादन को कम करते हैं। अंगूर के नियमित सेवन से हृदय और रक्त वाहिनियों (Cardiovascular system) को अत्यधिक लाभ होता है जिसके पीछे अंगूर में पाये जाने एंटीऑक्सीडेंट्स और शोथ कम करने वाले तत्वों की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है यूं तो हमारे शरीर की प्रत्येक कोशिका को ऑक्सीजन के अतिसक्रिय अणुओं से होने वाली क्षति से बचाव की जरूरत होती है पर धमनी की कोशिकाओं को इनसे बचाव की सबसे अधिक आवश्यकता होती है क्योंकि रक्त में ही इन अणुओं की अधिकता रहती है। यह बचाव अंगूर में पाये जाने वाले एंटीऑक्सीडेंट्स करते हैं।हृदय और रक्तवाहिनियों से सम्बन्धित कई रोगों की जड़ में जीर्ण शोथ होता है। अंगूर का शोथ कम करने वाला प्रभाव रक्तवाहिनियों की आंतरिक परत को इस जीर्ण शोथ से बचाता है और धमनी काठिन्य (Arteriosclerosis)

और धमनी में अवरोध उत्पन्न होने से रोकता है जो आगे चलकर हृदय शूल(Angina) और हृदयाघात(Heart attack) जैसे रोग उत्पन्न करने का कारण बनते हैं। फ्रांस के लोग संतृप्त वसा का अधिक सेवन करते हैं फिर भी उन लोगों में हृदय रोग कम होते पाये जाते हैं क्योंकि वे लाल अंगूर से बनी वाइन (Red wine) का भी खूब सेवन करते हैं।इसके अलावा अंगूर के सेवन से रक्तचाप नियंत्रित ही नहीं रहता बल्कि बढ़ा हुआ रक्तचाप कम भी हो जाता है। इसके सेवन से रक्त में कोलेस्ट्रॉल के स्तर के संतुलित रहने के साथ-साथ खराब कोलेस्ट्रॉल(Low-density Lipoprotein,LDL) के रक्त स्तर में भी कमी आती है।

ह्रदय रोग से बचाव करने वाला एक तत्व यह भी होता है कि अंगूर के सेवन से रक्त की कोशिकाओं के रक्तवाहिनियों की दीवार से चिपकने की प्रक्रिया भी धीमी हो जाती है।

मधुमेह के रोगियों के लिए हर फल सेवन योग्य नहीं होता। अंगूर इन रोगियों के लिए उपयोगी फल होता है। इसके सेवन से रक्त में शर्करा का स्तर ही संतुलित नहीं रहता बल्कि इंसुलिन का स्राव भी नियंत्रित रहता है तथा इन्सुलिन के प्रभाव में वृद्धि होती है।

10.बलपुष्टि व तृप्तिदायक-अंगूरासव(balapushti va trptidaayak-angooraasav)

अंगूरों का रस निकालकर आसव बना लिया जाए तो इसे लंबे समय तक सेवन किया जा सकता है। यह अंगूरासव एक बलपुष्टिदायक, स्फूर्तिदायक,तरावट और तृप्तिदायक योग है। यह योग बना-बनाया इसी नाम से बाजार में मिलता है।जो घर पर बनाना चाहें और बना सकें,उनकी जानकारी के लिए अंगूरासव बनाने की विधि,घटक द्रव्य आदि का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।घटक द्रव्य आदि का विवरण प्रस्तुत कर रहे हैं।

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(1).घटक द्रव्य(ghatak dravy)

मीठे ताजे अंगूर का रस 10 लीटर,शक्कर 5 किलो,धाय के फूल आधा किलो, चिकनी सुपारी 25 ग्राम,लौंग,जावित्री, दालचीनी,तेजपात,सोंठ,कालीमिर्च,पीपल, नागकेसर, अकरकरा,कमलकन्द,मीठा कूठऔर बबूल की छाल-ये सब औषधियां 20-20 ग्राम।

(2).निर्माण विधि(nirmaan vidhi)

सब द्रव्यों को मोटा-मोटा कूट लें। इनको अमृतबान में भरकर मुख बंद करके 15 दिन तक रखा रखा रहने दें। इसके बाद निकाल कर मोटे कपड़े से छान लें और बोतलों में भर लें।

 (3).सेवन विधि (sevan vidhi)

इस आसव को भोजन के बाद दोनों वक्त,4 से चम्मच तक, एक कप पानी में घोलकर पीएं।

(4). उपयोग(Use)

यह एक स्वादिष्ट,मधुर,बलवीर्यवर्द्धक चुस्ती-फुर्ती देने वाला, शरीर को पुष्ट व सडौल बनाने वाला,मन को प्रसन्न करने वाला, तृप्ति व तरावट देने वाला उत्तम टाॅनिक है जिसे व्यक्ति भी ले सकता है और औषधीय गुणयुक्त होने से सिरदर्द, अम्लपित्त,मन्दाग्नि,अनिद्रा,श्वास कास, तृषा, कमजोरी,ज्वर,जलन,चक्कर आना आदि किसी भी रोग का रोगी भी सेवन कर सकता है।

11.अंगूर के 10 स्वास्थ्य लाभ(10 health benefits of grapes)

अंगूर से संबंधित इतनी विस्तृत चर्चा के बाद आइए अब इसके घरेलू चिकित्सा में प्रयुक्त होने वाले कुछ उपयोग पर चर्चा करते हैं-

(1).दृष्ष्टि(drishti)

युवावस्था से ही अंगूर का सेवन करने से वृद्धावस्था में उम्र के प्रभाव से दृष्टि कम होने की समस्या(Macular Degeneration) से बचाव होता है। 

(2).ज्वर(Fever)

बुखार आने पर रोगी कमजोर हो जाता है, बार-बार मुंह सूखता है, प्यास लगती है पाचन शक्ति कमजोर हो जाती है,खाने पीने से अरुचि हो जाती है। शरीर में जलन,पीड़ा,व्याकुलता,मलावरोध,सिर दर्द, खांसी आदि तकलीफें होती हैं। इन सबको शांत करने के लिए रोगी को अंगूर के रस में पिसी काली मिर्च व सेन्धा नमक डालकर पिलाना बहुत गुणकारी होता है।

(3).तृषा व दाह(Trisha and Dah)

 गर्मी के प्रभाव से, शरीर में उष्णता बढ़ने से और मध का सेवन करने से होने वाले मदात्यय रोग के कारण से प्यास व जलन की शिकायत हो जाती है। इसे दूर करने के लिए अंगूर खाना चाहिए और अंगूर का रस पीना चाहिए। 

(4).कमजोरी(Weakness)

शरीर का दुबलापन, शारीरिक कमजोरी, पाचन शक्ति की कमजोरी, त्वचा में खुश्की,शरीर में खून की कमी,थोड़े से श्रम से थक जाना व सांस फूल जाना आदि शिकायतों को दूर करने के लिए सुबह-शाम अंगूर का 1-1 कप रस पीना चाहिए और दिन में अंगूर खाना भी चाहिए।इस उपाय से बहुत जल्दी लाभ होता है।

(5).गर्भावस्था(Pregnancy)

गर्भकाल में प्रतिदिन अंगूर खाना या अंगूर का रस पीना गर्भवती के शरीर व स्वास्थ्य के लिए बहुत गुणकारी होता है और पूरे 9 माह तक यह प्रयोग करने पर गर्भवती स्त्री यथा समय स्वस्थ, सुडौल और सुंदर शरीर वाले शिशु को जन्म देती है।

(6).सर्दी खांसी(cold cough)

प्रतिदिन 100 ग्राम मीठे अंगूर खाने से बार-बार होने वाले सर्दी जुखाम से निजात मिल जाती है। अंगूर के सेवन से फेफड़ों को शक्ति मिलती है और अंदर जमा कफ निकल जाता है जिससे खांसी चलना बंद हो जाती है। अंगूर खा कर आधे घंटे तक पानी नहीं पीना चाहिए ।

(7).दूध की कमी (doodh kee kamee)

शिशु को दूध पिलाने वाली माता को दूध कम उतरता हो तो प्रतिदिन 100 ग्राम अंगूर खाने और एक गिलास मीठा दूध पीने से दूध उतरने लगता है।

(8).आधासीसी (माइग्रेन)aadhaaseesee (maigren)

 सिर के आधे भाग में तेज सिर दर्द होना आधासीसी कहलाता है।सूर्योदय से पहले, ताजे मीठे अंगूर का एक कप रस पीने से सिर दर्द में लाभ होता है।

(9).कैंसर(Cancer)

कैंसर की उत्पत्ति में शरीर में लगातार बने रहने वाले शरीर क्रियात्मक तनाव (Oxidative stress)तथा जीर्ण शोथ की भी भूमिका रहती है। एंटीऑक्सीडेंट्स और शोथ कम करने वाले तत्वों के प्रभाव से, अंगूर का सेवन स्तन, प्रोस्टेट तथा बड़ी आंत के कैंसर से बचाव करने वाला होता है। बड़ी आंत के कैंसर में लाल व काला अंगूर विशेष प्रभावी होता है।

(10).आयु बढ़ाने वाला(aayu badhaane vaala)

अंगूर के अंदर पाये जाने वाले कई तत्व(Phytonutrients)आयु बढ़ाने वाले होते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण होता है रेसवरटोल(Resvertrol)अनुसन्धान से यह ज्ञात हुआ है कि यह उन जींस(Genes)को सक्रिय करता है जो आयु बढ़ाने वाली होती हैं। फिर इसके सेवन से पर्याप्त मात्रा में पोषक तत्व तो मिल जाते हैं पर ऊर्जा(केलोरी)कम मिलती है- यह भी आयु बढ़ाने वाला होता है।

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(1)..एक दिन में कितने अंगूर खाने चाहिए(How many grapes should you eat a day)

जब भी यह फल उपलब्ध हो तब कम से कम 30-40 अंगूर प्रतिदिन सेवन करना चाहिए।

(2).अंगूर कैसे खाएं(How to eat grapes)

ये एंटीऑक्सीडेंट्स अंगूर के छिलके व बीजों में प्रचुर मात्रा में होते हैं, इसके गूदे में इनकी मात्रा बहुत कम होती है यानी अंगूर को पूरा छिलके व बीजों सहित खाना चाहिए




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