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Causes of constipation

1.कब्ज के कारण(Causes Of Constipation)

आजकल कब्ज होना मामूली बात हो गई है। ऐसे भाग्यशा huली बहुत कम मिलते हैं जिन्हें दोनों वक्त गोया सुबह शाम खुलकर शौच हो जाता हो और शौच के लिए शौचालय में बैठ कर इंतजार ना करना पड़ता हो ऐसे लोगों को भाग्यशाली इसलिए कहा कि एक कब्ज के न होने से ही शरीर स्वस्थ, फुर्तीला और हष्ट -पुष्ट बना रह सकता है। एक कहावत है कि जिसे 1 मिनट में शौच हो जाता हों और किसी का एक पैसे का भी कर्जदार न हो उस  जैसा सुखी कौन होगा ?

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कब्ज  का सीधा संबंध खानपान से होता है। अनियमित आहार-विहार के कारण आंतों की स्वाभाविक कार्यप्रणाली नष्ट होकर कमजोर हो जाती है। इन्हीं कमजोर आंतों के कारण कब्ज, दर्द,वायु,अपच आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। अत्यधिक मिर्च मसाले अचार, फास्ट फूड, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ कब्ज को उत्पन्न करते हैं। इसी प्रकार मावे से बनी मिठाई अधिक चर्बी युक्त पदार्थ, चाय,काफी तथा शराब का अत्यधिक मात्रा में सेवन पाचन क्रिया को विकृत कर कब्ज का कारण बनता हैं।

इसके अलावा अन्य और भी कारण है जिसे निष्क्रिय जीवन, मानसिक तनाव,कम पानी पीने और नींद पूरी ना होने पर भी कब्ज की शिकायत हो जाती है।शौच क्रिया का निर्धारित समय ना होना,शौच क्रिया में जल्दबाजी करना,मल त्याग के समय चिंताग्रस्त रहना तथा शौच के वेग को रोकना भी कब्ज उत्पन्न करता है

आयुर्वेद के अनुसार शरीर में उत्पन्न होने वाले संपूर्ण रोगों की जड़ कब्ज है।साधारण सा लगने वाला यह रोग कई बार गंभीर स्थिति पैदा कर देता है। यधपि कब्ज घातक स्वरूप की व्याधि नहीं है लेकिन लंबे समय तक कब्ज रहने से इसका दुष्प्रभाव शरीर व मन दोनों पर पड़ता है। बदलते परिवेश में लोगों के खान-पान व रहन-सहन में व्यापक बदलाव आया है ।फास्ट फूड संस्कृति आज जीवन का अहम हिस्सा बन गई है ।अप्राकृतिक रहन-सहन और विकृत आहार-विहार के कारण ज्यादातर लोग आज कब्ज से ग्रस्त है।

2.कब्ज के दुष्प्रभाव(Constipation side effects)

 कब्जे से उत्पन्न होने वाले -कब्ज प्रायः समस्त रोगों का मूल कारण हैं अतः कब्ज के उपद्रव स्वरूप रोगी अनेकों रोगों से पीड़ित हो जाता है लगातार कब्ज रहने से मुंह में छाले,चर्मरोग, जुकाम तथा पायरिया,बवासीर,भगंदर,फिशर आदि रोग हो सकते हैं ।वर्षों पुरानी कब्ज,दमा,गठिया,श्वेतप्रदर,आंत्रशोथ,मोटापा,बालों का झड़ना,संग्रहणी तथा विभिन्न मानसिक रोगों की उत्पत्ति में सहायक हो जाती है।वात प्रकोप के कारण उत्पन्न होने वाली सभी व्याधियों जैसे जोड़ों का दर्द, पेट व कमर का दर्द, सिर दर्द, रग-पठ्ठों का दर्द,गृध्रसी(सायटिका) का दर्द, गैस ट्रबल, पेट फूलना,श्वास फूलना, अम्लपित्त (हायपरएसिडिटी) आदि को नष्ट करने के लिए सबसे पहले कब्ज को नष्ट करना जरूरी होता है।

3. कब्ज के लक्षण(Symptoms of constipation)

कब्ज के कारण मल का पूरी तरह निष्कासन नहीं हो पाता, इससे शरीर में भारीपन, सुस्ती एवं आलस्य बना रहता है खटटी डकारें आना ,मितली आना, गैस बनना,सिर,जंघा तथा पिंडलियों में दर्द, अनिद्रा भोजन में अरुचि, प्यास अधिक लगना, मुंह से दुर्गंध आना आदि लक्षण उत्पन्न होते हैं। जीभ पर सफेद परत जमा हो जाती है यह लक्षण बड़ी आंत में जमा मल के कारण उसमें दबाव बढ़ जाने के कारण होता है ।गैस बनने से छाती में दर्द, भारीपन, हृदय में दर्द, बेचैनी,चक्कर आना सारे शरीर में पसीना आना इत्यादि लक्षण पैदा होते हैं।

4.कब्ज से राहत(Constipation relief)

कब्ज दूर करने के उपाय 

ग्रीष्म ऋतु में कब्ज होना ज्यादा दुखदाई होता है क्योंकि यह भी वातप्रकोप में सहायक होता है।गैस -ट्रबल यानी वायु-प्रकोप का 'निज कारण' कब्ज होना ही होता है। जिन्हें कब्ज की शिकायत हुए निम्नलिखित उपाय नियमपूर्वक करें-

(1).प्रातः उठते ही कुल्ला करके या दंत मंजन करके एक गिलास ठंडा पानी पीकर इसके बाद एक गिलास गुनगुने गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पी लें, फिर शौच के लिए जाएं।

(2).शौच आने में देर लगे तो जोर न लगाएं बल्कि खड़े होकर पैरों को 2 फीट के फैसले से फैल कर  झुक जाएं और हथेलियां घुटनों पर रखकर सांस में जोर से बाहर फेंक दे।

(3).अब बाहर सांस रोके  हुए रखकर पेट को अंदर खींचें- छोड़ें। ऐसा जितनी बार कर सकें उतनी बार, सांस को बाहर रोके हुए रखकर, करें फिर सांस अंदर खींच कर खड़े हो जाएं। तीन -चार बार सांस लेकर सिर झुक जाएं और सांस बाहर फेंक कर पेट को बाहर भीतर चलाएं। ऐसा तीन- चार बार करके वापस शौच के लिए बैठ जाएं।इस क्रिया से मल जल्दी विसर्जित हो जाता है। इसे 'अग्निसार क्रिया' कहते हैं।

(4).भोजन करते समय अपना ध्यान चबाने पर केंद्रित रख कर इतनी बार चबाएं कि आहार पानी की तरह पतला होकर हलक में उतर जाए ।जल्दी जल्दी न चबाएं और न जबरदस्ती निगलें। याद रखें दातों का काम आंतों से लेना उचित नहीं ।अंग्रेजी की यह कहावत याद रखें-Drink your solids and eat your liquids यानी ठोस पदार्थों को इतना चबाओ कि उन्हें पी सको और तरल पदार्थों को चबाते हुए निगलो ताकि उनमें मुंह का लालारस(Saliva) भली भांति  मिल जाए वे ठीक से पच सकें।

(5).भोजन के साथ कच्चे सलाद के रूप में गाजर, मूली, हरी ककड़ी, प्याज, पत्ता गोभी, हरा धनिया, पालक की भाजी, मूली के पत्ते आदि में से जो भी उपलब्ध हो उन्हें बारीक काटकर सलाद के रूप में खाना चाहिए।संतुलित आहार पर ध्यान दें।भोजन में हरी सब्जी का प्रयोग करें। सब्जी के छिलके और पत्तियों में सेल्यूलोज नामक तत्व पाया जाता है,जो मल को अच्छी तरह से बाहर निकाल देता है।भोजन धीरे-धीरे खूब चबाकर खाएं ।रात को भोजन कम मात्रा में और हल्का होना चाहिए।

(6).शाम का भोजन थोड़ी कम मात्रा में और हल्का होना चाहिए। आजकल उल्टा ही हो रहा है। लोग लंच में हलका आहार लेते हैं और रात को डिनर में इत्मीनान से डटकर माल सुता करते हैं। ऊपर से कमाल की बात यह है कि रात को 9-10 बजे खाना खाते हैं और सो जाते हैं फिर कब्ज क्यों न हो? शाम को भोजन जितनी जल्दी कर सकें उतना ही अच्छा है वरना सोने से 2 घंटे पहले तो करना ही चाहिए 

(7).सोते समय ठंडे पानी या दूध के साथ सत इसब गोल 1-2 चम्मच मात्रा में प्रतिदिन सेवन करना चाहिए ।इससे सुबह शौच खुलकर होता हैं और पेट हल्का हो जाता है।शाम के वक्त अवश्य जाना चाहिए ।यदि अभी तक न जाते हों तो आज ही से  जाने लगें। एक निश्चित समय पर शौच के लिए जाएं और थोड़ी देर बैठ कर आ जाएं। शौच न आये तो जोर न लगाएं। वहीं घुटनों पर हाथ रखकर पेट को बाहर भीतर चलाने की क्रिया 50-60 बार करें ।धीरे-धीरे आदत बन जाएगी और शौच होने लगेगा ।शाम को शौच न जाना खुद कब्ज पैदा करना ही हैं।इतने  उपाय करने से कुछ ही दिनों में कब्ज से पिण्ड छूट जाएगा ।

यह कुछ उपाय है जिनको प्रयोग में लेकर नियमित रूप से अमल करन पर कब्ज से धीरे -धीरे दूर की  जा सकती है। सही तरीका यही है कि कब्ज होने ही न दी  जाए और यदि हो गई हो तो दवा का प्रयोग करने से पहले इन उपायों से कब्ज को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। यदि सफलता न मिले तोi आगे प्रस्तुत की गई चिकित्सा करनी चाहिए और इन नियमों का पालन भी करते रहना चाहिए ।

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छोटी हरड़-

कब्ज दूर करने के लिए छोटी हरड़ (बाल हरड़) के चूर्ण का उपयोग करना और निरापद भी होता है और  हर तरह की कब्ज यानि  मामूली कब्ज, कठोर कब्ज, नई कब्ज, पुरानी कब्ज आदि के लिए कारामद भी होता है। हरड. रसायन के गुणों वाली होने से शरीर का पोषण भी करती है, जैसा कि कहा भी है-हरीतकी मनुष्याणां मातेव हितकारिणी। कदाचित् कुप्यते माता नोदरस्था हरीतिकी।'अर्थात् मनुष्यों के लिए हरड़ माता के समान हितकारी होती है ।माता तो कभी-कभी क्रोध भी हो जाती है पर पेट में गई हुई हरड़ कभी कुपित नहीं होती ।एक स्थान पर और भी और भी कहा है -'मातायस्य गृहे नास्ति तस्य  माता हरीतकी' यानि जिसके घर में माता न हो, उसके लिए हरड़ माता के समान( पोषण और हित करने वाली)हैं। कब्ज दूर करने के लिए हरड़ को, निम्नलिखित विधियों  के अनुसार, सेवन करना चाहिए।

(1). सुबह का भोजन करने के बाद, एक छोटी हरड़ के बारीक टुकड़े कर,मुंह में रख लें और लगभग घंटे भर तक चूसते रहें। घंटे भर तक इसे चूसने के बाद चबाकर निगल जाएं। इसका स्वाद अप्रिय होने से  शुरु-शुरु में असुविधा और बदहजमी  होगी पर फिर आदत पड़ जाएगी ।इसे सिर्फ एक बार सुबह के  भोजन(Lunch)  के बाद चूसना के  काफी हैं।इसे लगातार जीवन-पर्यंत सेवन किया जा सकता है ।सभी और ऋतुओं मेंऔर सभी उम्र वालों के लिए यह सेवन योग्य है ।केवल शरीर अत्यंत थका हुआ, अत्यंत दुर्बल,बहुत दुबला, भूखा प्यासा, अम्लपित्त बढ़ा हुआ या पित्त कुपित अवस्था में हो, तब हरड़ का सेवन नहीं करना चाहिए। गर्भवती स्त्री को भी हरड़ का लगातार सेवन नहीं करना चाहिए। इस प्रकार प्रतिदिन एक हरड़  के टुकड़े चूस कर निगलने काअभ्यास करने वाले को कब्ज होती ही नहीं और यदि हो तो धीरे-धीरे समाप्त हो जाती इसके अलावा अन्य लाभ भी होते हैं जैसे सब  उदर विकार दूर होते हैं, दस्त साफ होता है, भूख खुलकर लगती है,पाचन शक्ति तीव्र होती हैं, रक्त शुद्ध होता है, नेत्र ज्योति बढ़ती है और उम्र बढ़ जाने पर भी चश्मा लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। यह प्रयोग जीवन-पर्यन्त किया जा सकता है।

(2)रात को सोने से पहले छोटी हरड़ का महीना चुर्ण ठंडे पानी के साथ लेना होता है इसकी मात्रा अपने कोठे (पेट)की स्थिति के अनुसार स्वयं ही निर्धारित करनी होती है जो पांच-छह दिन में निश्चित हो जाती है। शुरू में आधा चम्मच (छोटा) चूर्ण फांक कर पानी के साथ निगल जाएं। सुबह शौच-क्रिया में क्या फर्क पड़ता है यह देखे। यदि कोई फर्क न पड़े तो दूसरे दिन सोने से पहले एक चम्मच चूर्ण लें। जब तक फर्क न पड़े तब तक चूर्ण की मात्रा बढ़ाते रहें। एक चम्मच मात्रा के बाद आधा-आधा चम्मच बढ़ाएं, एक -एक चम्मच नहीं। जिस मात्रा से सुबह उठते ही, अच्छे दबाव(प्रेशर)के साथ एक बंधा हुआ  दस्त हो और पेट हल्का हो जाए वही मात्रा व्यक्ति के लिए उचित होती है। उसी मात्रा को प्रतिदिन सोते समय लेते रहें। मात्रा निर्धारित करते समय एक  बात ध्यान में रखें कि जिस मात्रा में स्वाभावित ढंग से, बिना प्रतीक्षा किये, बिना जोर लगाए, सिर्फ एक बंधा हुआ दस्त ही हो वही मात्रा सेवनकर्ता के लिए उचित मात्रा होगी पर दस्त पतला आये, एक से अधिक दस्त हो जाए तो समझें कि चूर्ण की मात्रा ज्यादा हो गई लिहाजा दूसरे दिन चूर्ण की मात्रा कम कर लें। प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को चूर्ण की मात्रा को घटा-बढ़ा कर, अपने अनुकूल मात्रा स्वयं ही  निश्चित करनी होगी।एक बार मात्रा तय कर लेने के बाद भी, यदि कुछ दिनों के बाद वह मात्रा कम यानि प्रभावहीन अथवा ज्यादा यानि पतला दस्ते लाने वाली लगने लगे तो उस मात्रा में यथोचित घट-बढ़ करके फिर से अपने अनुकूल मात्रा को निश्रित कर ले प्रायः देखा गया है कि चूर्ण की मात्रा घटाने के मामले ज्यादा हुए हैं क्योंकि धीरे-धीरे, प्राकृतिक रूप से पाचन-यंत्र की प्रक्रिया सुधरती जाती है सशक्त होती  जाती है अतः पाचन सुधरने से कब्ज रहना स्वतः ही कम होता जाता है और इसलिए चूर्ण की मात्रा घटाना पड़ती है वरना पतले दस्त होने लगते हैं ।धीरे-धीरे जब कब्ज बनने की स्थिति, कम होते होते, बिल्कुल समाप्त हो जाती है तब हरड़ के चूर्ण को सेवन करने की जरूरत भी खत्म हो जाती है। यह स्थिति भले ही कितने समय बाद बने पर बनती जरूर है और चूर्ण के सेवन से छुटकारा मिल जाता है यानी सेवनकर्ता इसका आदी(Addicted) यानी सेवन के लिए विवश नहीं होता है। यह निरापद प्रयोग है

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यदि अधिक मात्रा में चूर्ण फांकने में असुविधा होती हो तो चूर्ण को आधा कप पानी में घोलकर, एक सांस में सटाक से, पी लेना चाहिए, ऊपर से 1-2 कुल्ले कर पानी भी पी लेना चाहिए। जो सोने से पहले दूध पीने के आदी हों वे दूध पहले पी लिया करें और इसके आधा घंटे बाद हरड़ चूर्ण सेवन करें। इस प्रकार जब तक कब्ज बिल्कुल दूर न हो जाए तब तक प्रयोग जारी रखें।

कब्जनाशक घरेलू नुस्खे(Constipation home remedies)

(1). मुलहठी का चूर्ण 100 ग्राम, सोंठ चूर्ण 10ग्राम और गुलाब के सूखे फूल 5ग्राम, तीनों को एक गिलास पानी में डालकर उबालें ।जब पानी आधा शेष रहे तब उतारकर छान लें। ठंडा करके सोते समय पिएं। यह नुस्खा कब्ज नाशक तो है ही, पेट में जमी हुई आंव को भी निकाल देता है।

(2).अजवायन,वायवडंग,निशोथ, सौंफ, काला नमक, छोटी हरड़-सब10-10ग्राम। काला दाना 50 ग्राम और सनाय35 ग्राम। सबको पीसकर मिला लें और शीशी में भर एयरटाइट ढक्कन लगाकर रखें। रात को सोते समय एक चम्मच चूर्ण गुनगुने गर्म पानी के साथ सेवन करें। इससे सुबह दस्त साफ होता है ।चूर्ण की मात्रा अपने कोठे की स्थिति के अनुसार कम ज्यादा कर लें। 

(3).डण्टल रहित सनाय की पत्ती 50 ग्राम, सौंफ 100 ग्राम, शक्कर का पिसा हुआ बुरा 200 ग्राम।सौंप को तवे पर सेक लें और सनाय की पत्ती के साथ मोटा-मोटा कूट लें। तीनों द्रव्यों को मिला लें। सोते समय एक या दो चम्मच या अपने स्थिति के अनुकूल मात्रा में गुनगुने गर्म पानी के साथ फांक लें।इसे लाभ न होने तक सेवन कर बंद कर दें। यह हलका जुलाब है।

(4).त्रिफला 300 ग्राम, काला नमक 150 ग्राम,सनाय100 ग्राम, अजवायन 100 ग्राम, और कालीमिर्च 100 ग्राम।अजवायन तवे पर सेक लें। सब द्रव्यों को अलग-अलग कूट पीसकर खूब बारीक करके मिला लें और शीशी में भर लें। सोते समय एक चम्मच चूर्ण ठंडे पानी के साथ सेवन करें।

इस नुस्खे का प्रयोग कब्ज होने पर ही करें और लाभ होने पर बंद कर दें। आरंभ 'कब्जनाशक' नुस्खों से करना  इसलिए उचित समझा  कि शरीर को स्वस्थ और निरोग रखने तथा वात प्रकोप के कारण उत्पन्न होने वाली सभी व्याधियों जैसे जोड़ों का दर्द, पेट व कमर का दर्द, सिर दर्द, रग-पठ्ठों का दर्द,गृध्रसी(सायटिका) का दर्द, गैस ट्रबल, पेट फूलना,श्वास फूलना, अम्लपित्त (हायपरएसिडिटी) आदि को नष्ट करने के लिए सबसे पहले कब्ज को नष्ट करना जरूरी होता है।


 

 

 


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