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International Yoga Day Today / Body and mind-brain health formula is to increase immunity with yoga, regular postures and pranayama.

International Yoga Day Today / Body and mind-brain health formula is to increase immunity with yoga, regular postures and pranayama.


(1).अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज / शरीर और मन-मस्तिष्क का स्वास्थ्य सूत्र है योग, नियमित आसन और प्राणायाम से इम्युनिटी बढ़ाये(International Yoga Day Today / Body and mind-brain health formula is to increase immunity with yoga, regular postures and pranayama.)


योग से लाभ पाने वालों के प्रयासों की कहानी, जानिए उन्हीं की जुबानी

उदयपुर. प्राचीन भारत के छह दर्शन में से प्रमुख योग आज कोरोना काल और व्यस्त जीवन शैली वाली जीवन चर्या में फिर प्रासंगिक हुआ है। नियम-संयम से जीने की राह दिखाने और सिखाने वाले योग को लेकसिटी के कई बाशिंदे शिद्दत से जी रहे हैं। रविवार को विश्व योग दिवस है।

इससे पहले भास्कर शहर के कुछ ऐसे योग अभ्यासियों से मुखातिब हुआ, जिनके छोटे-छोटे शारीरिक अभ्यास अपने आप में अनूठे हैं। इन लोगों का कहना है कि भले ही इनकी वर्जिश योग से सीधे नहीं जुड़ी हों, लेकिन प्रेरणा योग से ही मिली और इसका फायदा भी मिला। अब वे खुद को स्वस्थ महसूस करते हैं और दूसरों को भी प्रेरित करते हैं।

प्रेरक; किसी से कम नहीं हैं ये अभ्यास, इनका कहना है- योग ने दी संकल्प शक्ति

10 सेकंड टिकना मुश्किल, ये 21 मिनट हाफ प्लैंक करते हैं
डाॅ. अबीजर हुसैन ने बताया कि वे पिछले एक साल से योग कर रहे हैं। इससे पहले 20 साल से लगातार रनिंग पर जाते थे, लेकिन टखने में कुछ समस्या आने पर रनिंग छोड़नी पड़ी। फिर योग का अभ्यास शुरू किया। शुरुआत में हाफ प्लेंक करना शुरू किया। तब 30 सेकंड ही कर पाते थे, लेकिन अब वे 21 मिनट तक इस पॉजिशन में रह लेते हैं। अब टखने की परेशानी भी कम है।

नौवें फ्लोर पर घर, लिफ्ट नहीं सीढ़ियों से ही आती-जाती हैं ये

जसमीत कौर 6 महीने से योगा कर रही हैं। उनका अभ्यास अनूठा है। अपार्टमेंट में नौवें फ्लोर पर घर है। कहीं भी आना-जाना हो, सीढ़ियों का ही इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने 15 किलो वजन कम किया है। बकौल जसमीत, योग से ही इसकी संकल्प शक्ति मिली।

68 साल के बॉडी बिल्डर हैं हरीश, कहते हैं- योग देता है यह ताकत

हरीश चावला 68 साल के हैं। बॉडी बिल्डिंग में स्टेट लेवल पर गोल्ड मेडल जीत चुके हैं। जिम के अलावा शीर्षासन सहित योग क्रियाएं इनका रुटीन है। चावला कहते हैं- घर पर नियमित एक्साइज के अलावा रोज शीर्षासन करते हैं। लोग इस उम्र में 2 मिनट से ज्यादा शीर्षासन करने से मना करते हैं, लेकिन वे इससे चार गुना समय इस पर देते हैं। विश्वास ये कि योग ही यह ताकत दे रहा है।

हृदय और श्वसन तंत्र को मजबूत करते हैं योग के प्रयोग : एक्सपर्ट
योग प्रशिक्षक डॉ. गुनीत मोंगा बताती हैं कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए योग जरूरी है। यह न सिर्फ मन को शांत करता है, बल्कि संकल्प और निर्णय शक्ति भी बढ़ाता है। शरीर की इम्युनिटी पावर भी बढ़ती है। शुगर, कब्ज सहित उन तमाम बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती है, जो बिजी लाइफ स्टाइल के कारण आज आम हो गई हैं।

फिजियो डॉ. व्योम बोलिया बताते हैं कि खुद को फिट रखना है तो लगातार योग भी करते रहिए। इन अभ्यासों के लिए कोई उम्र निश्चित नहीं है, कोई भी कर सकता है। जिम में वेट ट्रेनिंग अगर मांसपेशियाें को मजबूत और सुडौल बनाती है तो योग से हृदय और श्वसन तंत्र के साथ प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
International Yoga Day Today / Body and mind-brain health formula is to increase immunity with yoga, regular postures and pranayama.
International Yoga Day Today / Body and mind-brain health formula is to increase immunity with yoga, 
regular postures and pranayama.


(2).अंतरराष्ट्रीय योग दिवस आज / मेवाड़ में है योग का ढाई हजार साल पुराना इतिहास, यहीं से फैली कई जगह शाखाएंInternational Yoga Day today / Mewar has two and a half thousand years old history of yoga, branches spread in many places from here


महर्षि पतंजलि ने स्वयं किया मेवाड़ के योग दर्शन का जिक्र

उदयपुर. अंतराष्ट्रीय योग दिवस रविवार को है। योग का नाम आते ही महर्षि पतंजलि के को याद किया जाता है। लेकिन योग की परंपरा मेवाड़ में भी ढाई हजार साल पुरानी है। योग का विकास देश के विभिन्न कोनों में होने के साथ मेवाड़ में भी हुआ। मेवाड़ की माध्यमिका नगरी (चित्तौड़) में यवनों ने हमला किया। इसका जिक्र भी महर्षि पतंजलि ने करते हुए माध्यमिका के चारों ओर घेरा डालने की घटना लिखी है।

महर्षि की लिखी किताब ‘महाभाष्य योग दर्शन’ और ‘चरक संहिता’ में मेवाड़ के कई योगियों की चर्चा की। मेवाड़ में सिद्ध, साधक, बौद्ध, जैन और वैष्णव आदि सम्प्रदायों में योग की परम्परा रही है। इस क्षेत्र के अरावली पहाड़ का चरक संहिता में करते है।
मेवाड़ की संस्कृति और इतिहास के जानकार श्रीकृष्ण जूगनू बताते हैं कि योग दर्शन को चार भागों में बांटने वाले पतंजलि व्यक्तिगत रूप से मेवाड़ के बारे में चित्तौड़ से सम्बन्ध रखने वाले राजा भोज ने बचपन में योग दर्शन की पहली प्रामाणिक पुस्तक ‘राजमार्तंड टिका’ लिखी थी।
कुछ जैनाचार्यो ने भी योग विषय पर काम किया। यहां शैव दर्शन में हठ योग, जप योग, क्रिया योग, मन्त्र योग जैसी क्रियाएं मेवाड़ में प्रचलित रहीं। आबू से बिजौलिया तक जगन रावल जैसे योगियों की टोलियों घूम घूमकर योग की चेतना को बनाये रखती है।

गवरी में भणिया जोगी का खेल इस क्षेत्र में योगियों के तप, चमत्कार और श्राप की कहानी के साथ सवा लाख शिष्यों की पुष्टि करता है।
लकुलिश सम्प्रदाय के अनुसार योग की साधनाएं होती। योगी ने महाराणा कुम्भा के रूप में जन्म लिया। ऐसी मान्यता राज प्रशस्ति शिलालेख में आई। इन सम्प्रदाय के योगी की शाखा एकलिंगजी, नागदा, चीरवा, अमरख, थूर, शोभागपुरा, पालड़ी(थूर), आहड़ से लेकर बिजौलिया के तिलस्वां तक शाखाएं चली जाती थी। पूरे क्षेत्र में योगी फैले हुए थे। यहां षंडग और अष्टांग योग भी प्रचलित रहे।

योगी गुमान सिंह की परंपरा में संतों ने किया है योगशास्त्रों का प्रणयन
रणथम्भौर के सारंग घर में योगशास्त्र के दोनों रूप दिए है। जो पौराणिक और हठ दोनों योग का प्रचार मेवाड़ में रहा।  जगन रावल की प्रेरणा पाकर महाराणा उदय सिंह ने उदयसागर की नींव रखी थी। उदयपुर को बसाने में नाथ संप्रदाय की काफी मदद रही।

महाराणा प्रताप  अमर सिंह इन सब ने योग के लिए आसन्न, धूणीयों और मठों को भूमिदान और ग्रामदान देकर विशेषाधिकार दिए। जिनमें खेड़ी, जहाजपुर, गोरख्या, मांडल, भमराज (राजसमन्द), करधर आदि प्रमुख है। महिलाओं में मीना पुरी ने महाराणा जवान सिंह के समय में योग क्रिया से समाधि ली।

इसके ताम्र पत्र भी उपलब्ध है। मेवाड़ में लगभग  2 हजार  वर्षों से योग की परंपरा रही है। बाठेड़ा के योगी गुमान सिंह की परंपरा में बावजी चतुर सिंह जी, संत मोहनलाल ने भी योगशास्त्रों का प्रणयन किया। इसके बाद महाराणा सज्जन सिंह ने महर्षि दयानंद से योगासन की शिक्षा प्राप्त की। कुछ समय पहले बाबा रामदेव उनके दादा गुरु की भूमि गोगुंदा के मोड़ी गांव में आए थे। यहां मेवाड़ के मंदिर में अभिलेख और शिलालेखों पर योग के चित्र बने हुए है।

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